Biographies & Autobiographies

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મહામાનવ સરદાર (Mahamanav Saradar)મહામાનવ સરદાર (Mahamanav Saradar)
મહામાનવ સરદાર (Mahamanav Saradar)
SPECIFICATION:
  • Publisher : Pravin Prakashan
  • By : Dinkar Joshi
  • Cover : Hardcover
  • Language : Gujarati
  • Edition : 2014
  • Pages : 350
  • Weight : 550 gm
  • ISBN-10 : 8177907034
  • ISBN-13 ‏ : ‎ 978-8177907032
$27
Mejda: The Family And The Early Life Of Sri Sri Paramahansa Yogananda (English and Bengali Edition)Mejda: The Family And The Early Life Of Sri Sri Paramahansa Yogananda (English and Bengali Edition)
Mejda: The Family And The Early Life Of Sri Sri Paramahansa Yogananda (English and Bengali Edition)
SPECIFICATION:
  • Publisher : Yogoda Satsanga Society of India
  • By : Sri Sananda Lal Ghosh
  • Cover : Paperback
  • Language : English, Bengali
  • Edition : 2004
  • Pages : 359
  • Weight : 322 gm.
  • ISBN-10 : 8189535269
  • ISBN-13 ‏ : ‎978-8189535261
DESCRIPTION:

This delightful biography paints a vivid portrait of Paramahansa Yogananda's early years, as seen form the author's unique perspective as his younger brother. The portrayals of other family members add to the appeal of this intimate account.

$16
Meri Priya KahaniyaanMeri Priya Kahaniyaan
Meri Priya Kahaniyaan
SPECIFICATION:
  • Publisher :Rajpal and Sons
  • By: Ramesh Chandra Shah (Author)
  • Binding : Hardcover
  • Language: Hindi
  • Edition :2012
  • Pages: 128 pages
  • Size : 20 x 14 x 4 cm
  • ISBN-10:9350640171
  • ISBN-13: 9789350640173

DESCRIPTION: 

एक लेखक के रूप में रमेशचंद्र शाह की पहचान भले ही आलोचक और निबंधकार की है, किन्तु किसी कथा-आंदोलन से जुड़े बिना भी उन्होंने हिन्दी कहानी की विकास यात्रा में सार्थक और उल्लेखनीय हस्तक्षेप किया है। उनके पांच प्रकाशित कहानी-संग्रह इसकी पुष्टि करते हैं। पारम्परिक किस्सागोई से शुरू कर, चरित्र प्रधान, एकालाप आदि अनेक रंगतों से समृद्ध अपनी पचास से ऊपर कहानियों में से चुन कर 11 कहानियों का यह कसा और गठा हुआ संकलन शाह जी ने ‘मेरी प्रिय कहानियाँ’ पुस्तकमाला के लिए विशेष रूप से तैयार किया है। अपनी लेखन-प्रक्रिया और कहानी संबंधी अपनी मान्यताओं को रेखांकित करते हुए, संकलन से शुरू में, लेखक ने विस्तृत भूमिका भी दी है।

                          $12
                          ParikhanaParikhana
                          Parikhana
                          SPECIFICATION:
                          • Publisher :Rajpal and Sons
                          • By: Nawab Wajid Ali Shah (Author)
                          • Binding : Paperback
                          • Language: Hindi
                          • Edition :2017
                          • Pages: 176 pages
                          • Size : 20 x 14 x 4 cm
                          • ISBN-10:9350643901
                          • ISBN-13: 9789350643907

                          DESCRIPTION: 

                          परीख़ाना जहाँ एक तरफ़ नवाब वाजिद अली शाह की रंगीन जि़न्दगी की खुली दास्तान है वहीं दूसरी तरफ़ यह उन्नीसवीं सदी की लखनवी संस्कृति का कीमती दस्तावेज़ है। नवाब वाजिद अली शाह (30 जुलाई 1822-21 सितम्बर 1887) अवध के दसवें और आखिरी नवाब थे जिन्होंने नौ वर्षों तक अवध पर शासन किया। साहित्य और संस्कृति से बेहद लगाव रखने वाले वे एक कुशल शासक और संवेदनशील राजा थे जिन्हें प्रेम-मोहब्बत में सराबोर रहना पसन्द था। वह कत्थक के कुशल नर्तक और शास्त्रीय संगीत के सच्चे साधक थे जिन्होंने कई नये राग भी ईजाद किये। शास्त्रीय गायन की विधा, ‘ठुमरी’ को लोकप्रिय करने में उनका महत्त्वपूर्ण योगदान था। लिखने-पढ़ने का भी नवाब वाजिद अली शाह को बहुत शौक था और उन्होंने 60 से अधिक पुस्तकों की रचना की। नवाब वाजिद अली शाह के शासनकाल में लखनऊ उत्तर भारत का सांस्कृतिक केन्द्र बन गया था जहाँ पर हर कलाकार को अपनी कला दर्शाने का अवसर प्राप्त होता था। लखनऊ में उन्होंने ‘परीख़ाना’ नाम का एक रंगारंग महल कायम किया जहाँ सैकड़ों लड़कियों को राजसी खर्च पर नृत्य और संगीत की शिक्षा दी जाती थी। यहाँ से निकली लड़कियों को ‘परी’ कहा जाता था जैसे सुलतान परी, माहरुख परी। इनमें से बहुतों के साथ नवाब वाजिद अली शाह ने ब्याह भी रचाया और उन्हीं सब परियों के रिश्तों का बेबाक बयान है इस किताब में। ‘परीख़ाना’ नाम की इमारत आज भी लखनऊ में स्थित है और इसमें संगीत विद्यालय चलाया जा रहा है।

                                                  $15
                                                  Ped Lagao Khushahali Lao
                                                  Ped Lagao Khushahali Lao
                                                  SPECIFICATION:
                                                  • Publisher :Rajpal and Sons
                                                  • By: Surendranath Saxena (Author)
                                                  • Binding :Paperback
                                                  • Language: Hindi
                                                  • Edition :2015
                                                  • Pages: 40 pages
                                                  • Size : 20 x 14 x 4 cm
                                                  • ISBN-10:: 9350643197
                                                  • ISBN-13: 9789350643198

                                                  DESCRIPTION: 


                                                                          $8
                                                                          Amartya SenAmartya Sen
                                                                          Amartya Sen
                                                                          SPECIFICATION:
                                                                          • Publisher :Rajpal and Sons
                                                                          • By: Richa Saxena (Author)
                                                                          • Binding :Paperback
                                                                          • Language: English
                                                                          • Edition :2016
                                                                          • Pages: 168 pages
                                                                          • Size : 20 x 14 x 4 cm
                                                                          • ISBN-10::93506423110
                                                                          • ISBN-13: 9789350642313

                                                                          DESCRIPTION: 

                                                                          Often called The Mother Teresa of Economics, Professor Amartya Sen is credited with giving a human face to the subject of Economics and bringing into its discourse issues such as social justice, democracy, freedom, philosophy, health care, gender inequality and literacy. Featuring in Time magazine's 2010 list of top 100 people in the world, Amartya Sen says, ''My job as an economist has been about identifying injustice, and I am concerned with developing human freedom and capabilities as tools." In 1998 Amartya sen was awarded the Nobel Prize for Economics for his work in welfare economics. His intellectual odyssey has taken him across the globe from Jadavpur, Kolkata, Delhi in India, to Oxford and Cambridge in the UK and Harvard and Berkeley in the US. He has authored several books many of which have been translated into more than 30 languages. Even at this age the amount of work and travel that he does is astounding and at the last count had been awarded 89 honorary doctorates. What makes Amartya Sen tick? What keeps him going? What were the defining moments in his life? Who and what have been the major influences in his life? Read about all this and more in the definitive biography which features some rare photographs from Amartya Sen's personal collection.

                                                                                                  $13
                                                                                                  Jaishankar Prasad Ki Shrestha KahaniyaanJaishankar Prasad Ki Shrestha Kahaniyaan
                                                                                                  Jaishankar Prasad Ki Shrestha Kahaniyaan
                                                                                                  SPECIFICATION:
                                                                                                  • Publisher : Rajpal and Sons 
                                                                                                  • By:  Jaishankar Prasad (Author)
                                                                                                  • Binding :Paperback
                                                                                                  • Edition :2019
                                                                                                  • Pages: 184 pages
                                                                                                  • Size : 20 x 14 x 4 cm
                                                                                                  • ISBN-10: 93506432610
                                                                                                  • ISBN-13: 9789350643266

                                                                                                  DESCRIPTION: 

                                                                                                  जयशंकर प्रसाद जहाँ उच्चकोटि के कवि थे, वहीं अच्छे कहानीकार भी थे। उनके पाँच कहानी-संग्रह प्रकाशित हुए जिन्होंने न सिर्फ हिन्दी कथा-साहित्य को समृद्ध किया बल्कि विशिष्ट विधा के प्रवर्तक कथाकार के रूप में उनकी पहचान बनाई। जयशंकर प्रसाद के लेखन में आदर्शवाद और प्राचीन गौरव गाथाओं की झलक मिलती है। उनकी कहानियों में भावना और आदर्श के बीच द्वंद्व का बहुत ही सशक्त चित्रण होता है जो उनकी कहानियों के पात्रों को यादगार बनाता है। ‘मदन मृणालिनी’ का मदन, ‘जहाँआरा’ का औरंगजेब, ‘पाप की पराजय’ का धनश्याम और ‘गुंडा’ का ननकूसिंह अविस्मरणीय पात्र बन गए हैं। इन कहानियों के अतिरिक्त उनकी सबसे प्रसिद्ध कहानी ‘छोटा जादूगर’ सहित बाईस कहानियाँ इस पुस्तक में सम्मिलित हैं।

                                                                                                                          $25
                                                                                                                          Dhoop Mein Nange PaonDhoop Mein Nange Paon
                                                                                                                          Dhoop Mein Nange Paon
                                                                                                                          SPECIFICATION:
                                                                                                                          • Publisher : Rajpal and Sons 
                                                                                                                          • By:  Swayam Prakash (Author)
                                                                                                                          • Binding :Hardcover
                                                                                                                          • Edition :2019
                                                                                                                          • Pages: 224 pages
                                                                                                                          • Size : 20 x 14 x 4 cm
                                                                                                                          • ISBN-10: 93865348610
                                                                                                                          • ISBN-13: 9789386534866

                                                                                                                          DESCRIPTION: 

                                                                                                                          सुपरिचित कहानीकार स्वयं प्रकाश का यह कथेतर, धूप में नंगे पाँव पारम्परिक विधाओं के साँचों को तोड़ता है। कहीं तो यह यात्रा-वृत है, तो कहीं डायरी, कहीं संस्मरण और फिर पढ़ते हुए इसमें कहीं आत्मकथा की झलक भी मिलती है जिसमें पाठकों को विविधता का एक जीवंत संसार मिलता है। धूप में नंगे पाँव को कहानीकार की कार्यशाला की एक झाँकी भी कहा जा सकता है जहाँ स्वयं प्रकाश का वह संसार है जो अब तक उनके लेखन में नहीं आया। किताब शुरू होती है जब वह नौकरी करने घर से निकले और खत्म वहाँ होती है जब वे सेवानिवृत्त होकर घर लौटते हैं। इस अवधि की गहमागहमी और कशमकश का पूरा लेखा-जोखा है इसमें कि कैसे जीवन की जद्दोजहद ने स्वयं प्रकाश का लेखक रूप गढ़ने में अहम भूमिका निभाई। स्वयं प्रकाश की पहचान मूलतः कहानीकार की है लेकिन उपन्यास, निबन्ध और नाटक की अन्य विधाओं में भी उन्होंने लिखा है। हिन्दी साहित्य में योगदान के लिए उन्हें अनेक सम्मानों से अलंकृत किया जा चुका है जिसमें उल्लेखनीय हैं-राजस्थान साहित्य अकादमी पुरस्कार, वनमाली स्मृति पुरस्कार और सुभद्रा कुमारी चौहान पुरस्कार।

                                                                                                                                                  $25
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                                                                                                                                                  Aur Panchhi Ud Gaya
                                                                                                                                                  SPECIFICATION:
                                                                                                                                                  • Publisher : Rajpal and Sons 
                                                                                                                                                  • By:  Vishnu Prabhakar (Author)
                                                                                                                                                  • Binding :Hardcover
                                                                                                                                                  • Edition :2015
                                                                                                                                                  • Pages: 204 pages
                                                                                                                                                  • Size : 20 x 14 x 4 cm
                                                                                                                                                  • ISBN-10:8170284775
                                                                                                                                                  • ISBN-13: 9788170284772

                                                                                                                                                  DESCRIPTION: 

                                                                                                                                                  यशस्वी साहित्यकार विष्णु प्रभाकर की बहुप्रतीक्षित आत्मकथा...साथ ही पूरी एक सदी के साहित्यिक जीवन तथा समाज और देश का चारों ओर दृष्टि डालता आईना और दस्तावेज़। विष्णु प्रभाकर अपने सुदीर्घ जीवन में साहित्य के अतिरिक्त सामाजिक नवोदय तथा स्वतंत्रता-संग्राम से भी पूरी अंतरंगता से जुड़े रहे-रंगमंच, रेडियो तथा दूरदर्शन सभी में वे आरंभ से ही सक्रिय रहे। शरत्चन्द्र चटर्जी के जीवन पर लिखी उनकी बहुप्रशंसित कृति ‘आवारा मसीहा’ की तरह यह भी अपने ढंग की विशिष्ट रचना है। यह आत्मकथा तीन खंडों में प्रकाशित है : पंखहीन (प्रथम खंड), मुक्त गगन में (द्वितीय खंड), और पंछी उड़ गया (तृतीय खंड)

                                                                                                                                                                          $15
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                                                                                                                                                                          Mahaan Yug Nirmata
                                                                                                                                                                          SPECIFICATION:
                                                                                                                                                                          • Publisher : Rajpal and Sons
                                                                                                                                                                          • By: Amritlal Nagar(Author)
                                                                                                                                                                          • Binding :Paperback
                                                                                                                                                                          • Language : Hindi
                                                                                                                                                                          • Edition :2012
                                                                                                                                                                          • Pages: 32 pages
                                                                                                                                                                          • Size : 20 x 14 x 4 cm
                                                                                                                                                                          • ISBN-10: 8170282179
                                                                                                                                                                          • ISBN-13: 9788170282174

                                                                                                                                                                          DESCRIPTION: 


                                                                                                                                                                                                  $7
                                                                                                                                                                                                  Yaadon Ki BaaraatYaadon Ki Baaraat
                                                                                                                                                                                                  Yaadon Ki Baaraat
                                                                                                                                                                                                  SPECIFICATION:
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                                                                                                                                                                                                  • By: Josh Malihabadi (Author)
                                                                                                                                                                                                  • Binding :Paperback
                                                                                                                                                                                                  • Language : Hindi
                                                                                                                                                                                                  • Edition :2019
                                                                                                                                                                                                  • Pages: 160 pages
                                                                                                                                                                                                  • Size : 20 x 14 x 4 cm
                                                                                                                                                                                                  • ISBN-10: 9386534673
                                                                                                                                                                                                  • ISBN-13 :9789386534675

                                                                                                                                                                                                  DESCRIPTION: 

                                                                                                                                                                                                  साफ़ और सीधी बात कहने वाले, जोश मलीहाबादी ने अपनी आत्मकथा उतनी ही साफ़गोई से बयां की है जितने वे खुद थे। 1898 में अविभाजित भारत में मलीहाबाद के यूनाइटिड प्राविन्स में एक साहित्यिक परिवार में उनका जन्म हुआ और नाम रखा गया, शब्बीर हसन खान। जब उन्होंने शायरी करनी शुरू की तो अपना नाम जोश मलीहाबादी रख लिया। जोशीले तो वे थे ही और सोच भी शुरू से ही सत्ता-विरोधी थी। ‘हुस्न और इंकलाब’ नज़्म के बाद उन्हें ‘शायर-ए-इंकलाब’ कहा जाने लगा। 1925 में उस्मानिया विश्वविद्यालय में जब वे काम करते थे, तो उन्होंने हैदराबाद के निज़ाम के खिलाफ़ एक नज़्म कही जिसके चलते उन्हें हैदराबाद छोड़ना पड़ा और उन्होंने कलीम नामक पत्रिका शुरू की जिसमें अंग्रेज़ों के खिलाफ़ लिखते थे। विभाजन के बाद जोश कुछ समय तक भारत में रहे। 1954 में उन्हें भारत सरकार ने पद्मभूषण से सम्मानित किया। लेकिन उर्दू ज़बान के कट्टर समर्थक जोश मलीहाबादी ने महसूस किया कि भारत में उर्दू ज़बान का पहले जैसा दर्जा नहीं रहेगा और इसलिए 1958 में वे पाकिस्तान जा बसे और आखिर तक वहीं रहे। 1982 में 83 साल की उम्र में उनका निधन हुआ। जोश मलीहाबादी की ज़िन्दगी जितनी विवादग्रस्त थी, उतनी ही उनकी यह आत्मकथा चर्चित रही। आज भी जोश मलीहाबादी का नाम ऊँचे दर्जे के शायरों में शुमार है और उनकी नज़्में और शे’र बहुत लोकप्रिय हैं। यही कारण है कि उनकी आत्मकथा को आज भी पाठक पढ़ना चाहते हैं।

                                                                                                                                                                                                                          $15
                                                                                                                                                                                                                          J. Krishnamurti - Ek JeevaniJ. Krishnamurti - Ek Jeevani
                                                                                                                                                                                                                          J. Krishnamurti - Ek Jeevani
                                                                                                                                                                                                                          SPECIFICATION:
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                                                                                                                                                                                                                          • By: Mary Lutyens (Author)
                                                                                                                                                                                                                          • Binding :Hardcover
                                                                                                                                                                                                                          • Language : Hindi
                                                                                                                                                                                                                          • Edition :2013
                                                                                                                                                                                                                          • Pages: 292 pages
                                                                                                                                                                                                                          • Size : 20 x 14 x 4 cm
                                                                                                                                                                                                                          • ISBN-10: 9350640708
                                                                                                                                                                                                                          • ISBN-13 :9789350640708

                                                                                                                                                                                                                          DESCRIPTION: 

                                                                                                                                                                                                                          1986 में 90 वर्ष की आयु में कृष्णमूर्ति की मृत्यु हुई, मेरी लट्यंस द्वारा लिखित उनकी वृहदाकार जीवनी के दो खंड ‘द यिअर्ज़ ऑव अवेकनिंग’ (1975) तथा ‘द यिअर्ज़ ऑव फुलफिलमेंट’ (1983) प्रकाशित हो चुके थे। तीसरा खंड ‘दि ओपन डोर’ 1988 में प्रकाशित हुआ। इन तीनों खंडों को मेरी लट्यंस ने ‘द लाइफ एंड डेथ ऑव जे. कृष्णमूर्ति’ नाम से एक ही पुस्तक में समेटा है। मेरी लट्यंस ही के शब्दों में ‘‘मुझे वह वक्त याद नहीं है, जब मैं कृष्णमूर्ति को नहीं जानती थी।’’ थियो साफी द्वारा उद्घोषित नये मसीहा के रूप में जब युवा कृष्णमूर्ति का पहली बार इंग्लैंड आना हुआ था, तब से उनके अंतिम वर्षों तक के जीवन को मेरी लट्यंस ने एक मित्र के तौर पर देखा है और उनकी समग्र जीवन-यात्रा समझने का जतन किया है। ‘कृष्णमूर्ति कौन या क्या थे?’ इस प्रश्न के उत्तर का अन्वेषण उनके जीवन और उनकी मृत्यु के संदर्भ में इन पृष्ठों में किया गया है। कृष्णमूर्ति के अनुसार, उन्होंने जो कुछ कहा है, वह सभी के लिए समान रूप से प्रासंगिक है। हम स्वयं सत्य को खोज सकें, इसमें आने वाली हर बाधा से हमें मुक्त करना ही उनका उद्देश्य है। कृष्णमूर्ति की शिक्षाओं और उनके जीवन में कहीं कोई फर्क नहीं है-अतएव उनका जीवन भी उनकी शिक्षा ही है; जीवन, जिसकी व्यापकता में मृत्यु भी समाविष्ट है। कृष्णमूर्ति की शिक्षाओं को समझने के लिए उनके जीवन की, उनकी मृत्यु की विशदता को जानना-समझना महत्त्वपूर्ण है। एक निवैयक्तिक व्यक्तित्व की अद्भुत गाथा.

                                                                                                                                                                                                                                                  $30
                                                                                                                                                                                                                                                  J. Krishnamurti - Ek JeevaniJ. Krishnamurti - Ek Jeevani
                                                                                                                                                                                                                                                  J. Krishnamurti - Ek Jeevani
                                                                                                                                                                                                                                                  SPECIFICATION:
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                                                                                                                                                                                                                                                  • By: Mary Lutyens (Author)
                                                                                                                                                                                                                                                  • Binding :Paperback
                                                                                                                                                                                                                                                  • Language : Hindi
                                                                                                                                                                                                                                                  • Edition :2018
                                                                                                                                                                                                                                                  • Pages: 292 pages
                                                                                                                                                                                                                                                  • Size : 20 x 14 x 4 cm
                                                                                                                                                                                                                                                  • ISBN-10: 9350641585
                                                                                                                                                                                                                                                  • ISBN-13 :9789350641583

                                                                                                                                                                                                                                                  DESCRIPTION: 

                                                                                                                                                                                                                                                  1986 में 90 वर्ष की आयु में कृष्णमूर्ति की मृत्यु हुई, मेरी लट्यंस द्वारा लिखित उनकी वृहदाकार जीवनी के दो खंड ‘द यिअर्ज़ ऑव अवेकनिंग’ (1975) तथा ‘द यिअर्ज़ ऑव फुलफिलमेंट’ (1983) प्रकाशित हो चुके थे। तीसरा खंड ‘दि ओपन डोर’ 1988 में प्रकाशित हुआ। इन तीनों खंडों को मेरी लट्यंस ने ‘द लाइफ एंड डेथ ऑव जे. कृष्णमूर्ति’ नाम से एक ही पुस्तक में समेटा है। मेरी लट्यंस ही के शब्दों में ‘‘मुझे वह वक्त याद नहीं है, जब मैं कृष्णमूर्ति को नहीं जानती थी।’’ थियो साफी द्वारा उद्घोषित नये मसीहा के रूप में जब युवा कृष्णमूर्ति का पहली बार इंग्लैंड आना हुआ था, तब से उनके अंतिम वर्षों तक के जीवन को मेरी लट्यंस ने एक मित्र के तौर पर देखा है और उनकी समग्र जीवन-यात्रा समझने का जतन किया है। ‘कृष्णमूर्ति कौन या क्या थे?’ इस प्रश्न के उत्तर का अन्वेषण उनके जीवन और उनकी मृत्यु के संदर्भ में इन पृष्ठों में किया गया है। कृष्णमूर्ति के अनुसार, उन्होंने जो कुछ कहा है, वह सभी के लिए समान रूप से प्रासंगिक है। हम स्वयं सत्य को खोज सकें, इसमें आने वाली हर बाधा से हमें मुक्त करना ही उनका उद्देश्य है। कृष्णमूर्ति की शिक्षाओं और उनके जीवन में कहीं कोई फर्क नहीं है-अतएव उनका जीवन भी उनकी शिक्षा ही है; जीवन, जिसकी व्यापकता में मृत्यु भी समाविष्ट है। कृष्णमूर्ति की शिक्षाओं को समझने के लिए उनके जीवन की, उनकी मृत्यु की विशदता को जानना-समझना महत्त्वपूर्ण है। एक निवैयक्तिक व्यक्तित्व की अद्भुत गाथा.

                                                                                                                                                                                                                                                                          $30
                                                                                                                                                                                                                                                                          Mera Desh NikalaMera Desh Nikala
                                                                                                                                                                                                                                                                          Mera Desh Nikala
                                                                                                                                                                                                                                                                          SPECIFICATION:
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                                                                                                                                                                                                                                                                          • By:  Dalai Lama(Author)
                                                                                                                                                                                                                                                                          • Binding :Paperback
                                                                                                                                                                                                                                                                          • Language : Hindi
                                                                                                                                                                                                                                                                          • Edition :2017
                                                                                                                                                                                                                                                                          • Pages: 272 pages
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                                                                                                                                                                                                                                                                          • ISBN-10: 81702886910
                                                                                                                                                                                                                                                                          • ISBN-13 :9788170288695

                                                                                                                                                                                                                                                                          DESCRIPTION: 

                                                                                                                                                                                                                                                                          यह आत्मकथा है शान्ति नोबेल पुरस्कार से सम्मानित परम पावन दलाई लामा की, जिनकी प्रतिष्ठा सारे संसार में है और जिन्हें तिब्बतवासी भगवान के समान पूजते हैं। चीन द्वारा तिब्बत पर आधिपत्य स्थापित किए जाने के बाद 1959 में उन्हें तिब्बत से निष्कासित कर दिया और वे पिछले 51 वर्षों से भारत में निर्वासित के रूप में अपना जीवन ही रहे हैं। 1938 में जब वे केवल दो वर्ष के थे तब उन्हें दलाई लामा के रूप में पहचाना गया। उन्हें घर और माता-पिता से दूर ल्हासा के एक मठ में ले जाया गया जहाँ कठोर अनुशासन और अकेलेपन में उनकी परवरिश हुई। सात वर्ष की छोटी उम्र में उन्हें तिब्बत का सबसे बड़ा धार्मिक नेता घोषित किया गया और जब वे पंद्रह वर्ष के थे उन्हें तिब्बत का सर्वोच्च राजनीतिक पद दिया गया। एक प्रखर चिंतक, विचारक और आज के वैज्ञानिक युग में सत्य और न्याय का पक्ष लेने वाले धर्मगुरु की तरह दलाई लामा को देश-विदेश में सम्मान मिलता है। यह आत्मकथा है देश निकाला पाने वाले एक निर्वासित शांतिमय योद्धा के संघर्ष की जिसके प्रत्येक पृष्ठ पर उनके गंभीर चिंतन की झलक मिलती है और जीवन के लिए प्रेरणाप्रद विचार भी।

                                                                                                                                                                                                                                                                                                  $20
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                                                                                                                                                                                                                                                                                                  Mera Desh Nikala
                                                                                                                                                                                                                                                                                                  SPECIFICATION:
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                                                                                                                                                                                                                                                                                                  • By:  Dalai Lama(Author)
                                                                                                                                                                                                                                                                                                  • Binding :Hardcover
                                                                                                                                                                                                                                                                                                  • Language : Hindi
                                                                                                                                                                                                                                                                                                  • Edition :2010
                                                                                                                                                                                                                                                                                                  • Pages: 272 pages
                                                                                                                                                                                                                                                                                                  • Size : 20 x 14 x 4 cm
                                                                                                                                                                                                                                                                                                  • ISBN-10: 8170288673
                                                                                                                                                                                                                                                                                                  • ISBN-13 :9788170288671

                                                                                                                                                                                                                                                                                                  DESCRIPTION: 

                                                                                                                                                                                                                                                                                                  यह आत्मकथा है शान्ति नोबेल पुरस्कार से सम्मानित परम पावन दलाई लामा की, जिनकी प्रतिष्ठा सारे संसार में है और जिन्हें तिब्बतवासी भगवान के समान पूजते हैं। चीन द्वारा तिब्बत पर आधिपत्य स्थापित किए जाने के बाद 1959 में उन्हें तिब्बत से निष्कासित कर दिया और वे पिछले 51 वर्षों से भारत में निर्वासित के रूप में अपना जीवन ही रहे हैं। 1938 में जब वे केवल दो वर्ष के थे तब उन्हें दलाई लामा के रूप में पहचाना गया। उन्हें घर और माता-पिता से दूर ल्हासा के एक मठ में ले जाया गया जहाँ कठोर अनुशासन और अकेलेपन में उनकी परवरिश हुई। सात वर्ष की छोटी उम्र में उन्हें तिब्बत का सबसे बड़ा धार्मिक नेता घोषित किया गया और जब वे पंद्रह वर्ष के थे उन्हें तिब्बत का सर्वोच्च राजनीतिक पद दिया गया। एक प्रखर चिंतक, विचारक और आज के वैज्ञानिक युग में सत्य और न्याय का पक्ष लेने वाले धर्मगुरु की तरह दलाई लामा को देश-विदेश में सम्मान मिलता है। यह आत्मकथा है देश निकाला पाने वाले एक निर्वासित शांतिमय योद्धा के संघर्ष की जिसके प्रत्येक पृष्ठ पर उनके गंभीर चिंतन की झलक मिलती है और जीवन के लिए प्रेरणाप्रद विचार भी।

                                                                                                                                                                                                                                                                                                                          $25
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                                                                                                                                                                                                                                                                                                                          Meri Priya Kahaniyaan
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                          SPECIFICATION:
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                                                                                                                                                                                                                                                                                                                          • By:  Kamleshwar (Author)
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                          • Binding : Paperback
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                          • Language : Hindi
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                                                                                                                                                                                                                                                                                                                          • ISBN-13 :9789350640586

                                                                                                                                                                                                                                                                                                                          DESCRIPTION: 

                                                                                                                                                                                                                                                                                                                          हिन्दी साहित्य के आधुनिक कहानीकारों में कमलेश्वर की कहानियों का ऊँचा स्थान है। कहानी को एक सार्थक और समानतापरक मोड़ देने में इनका बड़ा हाथ रहा है। इस संकलन में कमलेश्वर की अपनी प्रिय कहानियाँ, उनकी कहानी-सम्बन्धी मूल धारणाओं को व्यक्त करने वाली भूमिका के साथ, संकलित हैं।

                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                  $12
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                  Mehfil
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                  Mehfil
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                  SPECIFICATION:
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                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                  • By:  Kamleshwar (Author)
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                  • Binding : Hardcover
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                  • Language : Hindi
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                  • Edition :2003
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                  • Pages: 106 pages
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                  • Size : 20 x 14 x 4 cm
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                  • ISBN-10: 8170284538
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                  • ISBN-13 :9788170284536

                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                  DESCRIPTION: 

                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                  निर्मला देशपांडे, दिलीप चित्रे, बाबूराव बागुल, वसंत नरहर फेणे मराठी साहित्य के जाने-माने नाम हैं। उनकी और अन्य मराठी लेखकों की चुनी हुई कहानियाँ इस पुस्तक में प्रस्तुत हैं जिनका चुनाव हिन्दी के प्रसिद्ध साहित्यकार कमलेश्वर ने किया है और साथ ही एक विस्तृत भूमिका भी लिखी है। प्रत्येक भाषा का मिज़ाज अपना ही होता है, औरों से कुछ हटकर। इस संकलन में आप मराठी कहानी का अपना खास तेवर, अपनी खास रवानी पाएंगे। यह पुस्तक हिन्दी के पाठकों को मराठी कहानियों और साहित्य को जानने का अवसर प्रदान करती है।

                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                          $10
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                          Jo Maine JiyaJo Maine Jiya
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                          Jo Maine Jiya
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                          SPECIFICATION:
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                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                          • By:  Kamleshwar (Author)
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                          • Binding : Hardcover
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                          • Language : Hindi
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                          • Edition :2014
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                          • Pages: 224 pages
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                          • Size : 20 x 14 x 4 cm
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                          • ISBN-10: 8170281229
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                          • ISBN-13 :9788170281220

                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                          DESCRIPTION: 

                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                          अपनी मौलिक सूझबूझ और नज़रिये को लेकर लगातार चर्चित तथा विवादास्पद रहने वाले कमलेश्वर की बातें रोचक भी है और पाठकों को अपने साथ अतीत व भविष्य में बहा ले जाने का मादूदा भी रखती है। उम्र की एक खास दहलीज पर पैर रखते ही आदमी को अचानक बीते दिन घेरने लगते है, यादों के धुंधले अक्स साफ दिखने लगते है और बेहद याद आने लगते हैँ--वक्त की पिछली गलियों, घोडों, चौराहों पर पीछे छुट गये लोगों और इन यादों के झरोखे से दिखाई देती है एक पूरी दुनिया-हलचलों, दोस्ती-दुश्मनी, आधी शताब्दी के अनेक छोटे- बड़े साहित्यिक कारनामों और इतिहास-प्रसंगों से भरी-पूरी दुनिया। 'जो मैंने जिया' में कमलेश्वर की इसी दुनिया का चित्रण है।

                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                  $15
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                  Jalti Hui NadiJalti Hui Nadi
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                  Jalti Hui Nadi
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                  SPECIFICATION:
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                  • Publisher : Rajpal and Sons
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                  • By:  Kamleshwar (Author)
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                  • Binding : Hardcover
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                  • Language : Hindi
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                  • Edition :2016
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                  • Pages: 206 pages
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                  • Size : 20 x 14 x 4 cm
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                  • ISBN-10: 8170282985
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                  • ISBN-13 :9788170282983

                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                  DESCRIPTION: 

                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                  "ग़ज़ल के इतिहास में जाने की ज़रूरत मैं महसूस नहीं करता। साहित्य की हर विधा अपनी बात और उसे कहने के ढब से, संस्कारों से फ़ौरन पहचानी जाती है। ग़ज़ल की तो यह ख़ासियत है। आप उर्दू जानें या न जानें, पर ग़ज़ल को जान भी लेते हैं और समझ भी लेते हैं। जब 13वीं सदी में, आज से सात सौ साल पहले हिन्दी खड़ी बोली के बाबा आदम अमीर खुसरो ने खड़ी बोली हिन्दी की ग़ज़ल लिखी: जब यार देखा नयन भर दिल की गई चिंता उतर, ऐसा नहीं कोई अजब राखे उसे समझाय कर। जब आँख से ओझल भया, तड़पन लगा मेरा जिया, हक्का इलाही क्या किया, आँसू चले भर लाय कर। तू तो हमारा यार है, तुझ पर हमारा प्यार है, तुझे दोस्ती बिसियार है इक शब मिलो तुम आय कर। जाना तलब तेरी करूं दीगर तलब किसकी करूं, तेरी ही चिंता दिल धरूं इक दिन मिलो तुम आय कर। तो ग़ज़ल का इतिहास जानने की ज़रूरत नहीं थी। अमीर खुसरो के सात सौ साल बाद भी बीसवीं सदी के बीतते बरसों में जब दुष्यंत ने ग़ज़ल लिखी : कहाँ तो तय था चिरागाँ हरेक घर के लिए, कहाँ चिराग़ मय्यसर नहीं शहर के लिए। तब भी इतिहास को जानने की ज़रूरत नहीं पड़ी। जो बात कही गयी, वह सीधे लोगों के दिलो-दिमाग़ तक पहुँच गयी। और जब 'अदम' गोंडवी कहते हैं : ग़ज़ल को ले चलो अब गाँव के दिलकश नज़रों में, मुसलसल फ़न का डीएम घुटता है इन अदबी इदारों में। तब भी इस कथन को समझने के लिए इतिहास को तकलीफ़ देने की ज़रूरत नहीं पड़ती। ग़ज़ल एकमात्र ऐसी विधा हजो किसी ख़ास भाषा के बंधन में बँधने से इंकार करती है। इतिहास को ग़ज़ल की ज़रूरत है, ग़ज़ल को इतिहास की नहीं। इसलिए यह संकलन अभी अधूरा है। ग़ज़ल की तूफ़ानी रचनात्मक बाढ़ को संभाल सकना सम्भव नहीं है। शेष-अशेष अगले संकलनों में। - कमलेश्वर "

                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                          $20
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                          Ankhon Dekha PakistanAnkhon Dekha Pakistan
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                          Ankhon Dekha Pakistan
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                          SPECIFICATION:
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                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                          • By:  Kamleshwar (Author)
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                          • Binding : Hardcover
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                          • Language : Hindi
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                          • Edition :2014
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                          • Pages: 168 pages
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                          • Size : 20 x 14 x 4 cm
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                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                          • ISBN-13 : 9788170286417

                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                          DESCRIPTION: 

                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                          पिछले दिनों कमलेश्वर को पाकिस्तान जाने का अवसर मिला लेखकों के सम्मेलन में। वहाँ रहकर, छोटे-बड़े, सभी व्यक्तियों से मिलकर, पाकिस्तानी लेखकों और लेखिकाओं से खुले दिल से बातें करके, वहाँ की सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति को देख-भाल कर जो अनुभव उन्होंने प्राप्त किए, उन्हें अपने खास अन्दाज़ में लिखा है। पाकिस्तान आज एक कठिन दौर से गुजर रहा है। अनेक विरोधाभासों, विषमताओं और विसंगतियों में लोग जी रहे हैं। जहाँ एक ओर गरीबों की पराकाष्ठा है तो दूसरी ओर अमीरी और जागीरदारी की। एक ओर सरकारी तौर पर शराबबन्दी है तो दूसरी ओर अमीरों के घर-घर में मयखाने खुले हैं। इन्हें पढ़कर आज के पाकिस्तान का सजीव चित्र आपके सामने आएगा। इस पुस्तक का एक विशेष प्रसंग है उन कैदियों के पत्र जो उन्होंने कमलेश्वर को लिखे। जो हिन्दुस्तान और पाकिस्तान के जेलों में कई वर्षों से बन्द हैं।

                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                  $18
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                  Wah UstadWah Ustad
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                  Wah Ustad
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                  SPECIFICATION:
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                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                  • By:   Praveen Kumar Jha(Author)
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                  • Binding : Paperback
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                  • Language :  Hindi
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                  • Edition :2020
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                  • Pages: 176 pages
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                  • Size : 20 x 14 x 4 cm
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                  • ISBN-10: 9389373271
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                  • ISBN-13 :9789389373271

                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                  DESCRIPTION: 

                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                  ताल गया तो बाल गया सुर गया तो सर गया ऐसी होती है भारतीय शास्त्रीय संगीत के घरानों की परंपरा - जहाँ संगीत के हर एक पहलू पर इतना बारीकी से ध्यान दिया जाता है। वर्षों की कड़ी मेहनत और रियाज़ से ही बन पाता है कोई ऐसा गायक कि जिसे सुनकर श्रोता कह उठते हैं - वाह उस्ताद!! ग्वालियर घराना, आगरा घराना, भिंडी बाज़ार घराना, दिल्ली घराना, पटियाला घराना....ये नाम हैं उत्तर भारत के शास्त्रीय संगीत से जुड़े घरानों के। हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत में घरानों की परंपरा रही है। देश के अलग-अलग प्रांतों से इन घरानों की शुरुआत हुई और उसी जगह के नाम पर रखे गये हैं घरानों के नाम। हर घराने की अपनी खासियत, अपना इतिहास और अपना वंश है। यूँ तो संगीत का आनंद लेने के लिए ज़रूरी नहीं कि संगीत का ज्ञान हो लेकिन अगर थोड़ी बहुत संगीत की जानकारी हो, यह मालूम हो कि गायक और वादक के संगीत का क्या संदर्भ है, तो उसे सुनने में और ही आनंद आता है। इस पुस्तक में अलग-अलग घरानों से संबंधित जानकारी और उससे जुड़े किस्से-कहानियाँ हैं। इनमें से कई किस्से-कहानियाँ लेखक की सुनी-सुनाई हैं तो कई जगह अधिक रोचक बनाने के लिए मौजूदा तथ्यों का नाटकीयकरण किया गया है। लेकिन कुल मिलाकर इन सबसे पाठक की संगीत में रुचि तो बढ़ती है और साथ में आनंद भी। प्रवीण कुमार झा पेशे से चिकित्सक हैं लेकिन साहित्य में उनकी गहरी रुचि है। वे हिन्दी और अंग्रेज़ी, दोनों भाषाओं में लिखते हैं और उनका ब्लॉग बहुत लोकप्रिय है। बिहार में पले-बढ़े प्रवीण कुमार ने पूना, दिल्ली और बंगलूरु में मेडिकल की पढ़ाई की। हाल में प्रकाशित उनकी पुस्तक कुली लाइन्स बहुचर्चित है। वर्तमान में वे नॉर्वे में रहते हैं। इनका संपर्क है: doctorjha@gmail.com

                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                          $30
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                          Umrao Jaan AdaUmrao Jaan Ada
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                          Umrao Jaan Ada
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                          SPECIFICATION:
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                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                          • By:    Mirza Hadi Ruswa  (Author)
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                          • Binding : Paperback
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                          • Language :  Hindi
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                          • Edition :2017
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                          • Pages: 224 pages
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                          • Size : 20 x 14 x 4 cm
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                          • ISBN-10: 9386534312
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                          • ISBN-13 :9789386534316

                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                          DESCRIPTION: 

                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                          उमराव जान उन्नीसवीं सदी की लखनऊ की तवायफ़ थी जो अपनी खूबसूरती, शोख अदाओं और नाच-गाने के साथ अपनी शायरी के लिए भी मशहूर थी। हर शाम उसका कोठा घुँघरुओं की गूँज, जामों की खनक, शेरो-शायरी की वाहवाही से गुलज़ार हो उठता और खानदानी रईस, जोशीले नवाबज़ादे, नामी गुण्डे, शराबी-कबाबी उसकी रौनक बढ़ाते। उमराव जान अदा पढ़ते पाठक की आँखों के करीब दो सौ साल पहले की लखनवी तहज़ीब की जीती-जागती तस्वीर उभर आती है। लेकिन उमराव जान की चमक शानो-शौकत के पीछे एक छोटी-सी लड़की, अमीरन की दिल को छू लेने वाली दुखभरी कहानी है। कम उम्र में अमीरन का अपहरण कर उसे कोठे पर बेचा जाता है। अमीरन से उमराव जान बनी लड़की का शरीर मजबूरन कोठे पर है, लेकिन उसकी रूह फ़ैजाबाद के अपने घर की तलाश में भटकती रहती है। 1899 में उर्दू में पहली बार उमराव जान अदा प्रकाशित हुई थी। माना जाता है कि लेखक की मुलाकात उमराव जान से एक मुशायरे में हुई और उसने अपनी कहानी बयान की और लेखक ने इसे इस ढंग से लिखा जैसे उमराव जान खुद अपनी दास्तान बयाँ कर रही हो। एक सदी से भी ज़्यादा समय बीत जाने के बाद भी उमराव जान का रोमाँच वैसे ही बरकरार है और लोग आज भी उसके बारे में जानने को बेकरार रहते हैं-चाहे किताब की बाबत हो या फिर फ़िल्म के।

                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                  $31
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                  Scrapbook of a Prime Minister
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                  Scrapbook of a Prime Minister
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                  SPECIFICATION:
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                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                  • By:  I.K. GUJRAL(Author)
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                  • Binding : Hardcover
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                  • Language :  English
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                  • Edition :2008
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                  • Pages:134 pages
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                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                  • ISBN-10: 8170287413
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                  • ISBN-13 :9788170287414

                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                  DESCRIPTION: 

                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                  This is a scrap book. It is a collection of excerpts from some of my jumbled readings of books and journals that came my way at different occasions. I made a habit of keeping a scrap book long ago during my university days, inspired by an enlightened Principal of our college - J W Thomas, who was endowed with a bright mind and unbiased views of education even in the days of British rule. This is not the only reason for my habit of keeping the scrap book. The socio-diplomatic life in the Soviet Union was conducive to my reading a variety of books about the world and keeping notes for reference.' - I K Gujral

                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                          $12
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                          100 Prasiddh Bharatiya Khiladi100 Prasiddh Bharatiya Khiladi
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                          100 Prasiddh Bharatiya Khiladi
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                          SPECIFICATION:
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                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                          • By:  Chitra Garg (Author)
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                          • Binding : Hardcover
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                          • Language : Hindi
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                          • Edition :2013
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                          • Pages: 320 pages
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                          • Size : 20 x 14 x 4 cm
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                          • ISBN-10: 8170287561
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                          • ISBN-13 :9788170287568

                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                          DESCRIPTION: 

                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                          इस पुस्तक में भारत के 100 चुनिंदा खिलाड़ियों का जीवन-चित्र और खेल के क्षेत्र में उनके योगदान का परिचयात्मक वर्णन प्रस्तुत है। हर खिलाड़ी ने जो उपलब्धियाँ प्राप्त की हैं उनका भी उल्लेख किया गया है। बैडमिंटन से लेकर शतरंज तक और नौका दौड़ से लेकर वेटलिफ्टिंग तक बाइस खेलों में से एक सौ खिलाड़ियों को इसमें सम्मिलित किया गया है। अपने खेल में सफलता और प्रसिद्धि प्राप्त करने के लिए खिलाड़ियों को कितना संघर्ष करना पड़ा और कैसी-कैसी कठिनाइयों से गुज़रकर सफलता के शिखर पर पहुँचे—इन बातों का भी ब्यौरा दिया गया है। यह मात्र एक उपयोगी संदर्भ-ग्रंथ ही नहीं, बल्कि एक प्रेरणात्मक और रोचक पुस्तक भी है। चार उपयोगी परिशिष्ट पुस्तक की उपयोगिता बढ़ाते हैं।

                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                  $15

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