Rajpal and Sons

Rajpal and Sons

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Dhyaan (Hindi Edition)
Dhyaan (Hindi Edition)
Specification:
  • Publisher : Rajpal & Sons
  • By : J. Krishnamurthy
  • Cover : Paperback
  • Language : Hindi
  • Edition : 2015
  • Pages : 160
  • Weight : 221 gm.
  • Size : 5.5 x 0.4 x 8.5 inches
  • ISBN-10 : 8170287235
  • ISBN-13 : 978-8170287230

 

$19
Sanskrit Swyam Shikshak (Hindi Edition)
Sanskrit Swyam Shikshak (Hindi Edition)
Specification:

 

  • Publisher : Rajpal & Sons
  • By : Shripad D. Satvlekar
  • Cover : Paperback
  • Language : Hindi
  • Edition : 2013
  • Pages : 364
  • Weight : 257 gm
  • Size : 7.9 x 5.5 x 1.6 inches
  • ISBN-10 : 8170285747
  • ISBN-13 : 978-8170285748
Description:

Sanskrit Self Learner. An easy guide to learning Sanskrit on your own without attending any classes or going to a teacher. * Written by the renowned Sanskrit scholar, Shripad Damodar Satvalekar, complete with self-testing exercises, the book has proved popular both with students as well as educational institutions. Bi-lingual

 

$18
Dhai Ghar (Hindi Edition)
Dhai Ghar (Hindi Edition)
Specification:
  • Publisher : Rajpal & Sons
  • By : Giriraj Kishore
  • Cover : Hardcover
  • Language : Hindi
  • Edition : 2001
  • Pages : 396
  • Weight : 589 gm
  • Size : 7.9 x 5.5 x 1.6 inches
  • ISBN-10 : 8170289475
  • ISBN-13 : 978-8170289470
$27
Lokpriy Shayar Aur Unki Shayari-Firaq Gorakhpuri (Hindi Edition)
Lokpriy Shayar Aur Unki Shayari-Firaq Gorakhpuri (Hindi Edition)
SPECIFICATION:
  • Publisher : Rajpal and Sons
  • By : Prakash Pandit
  • Cover : Paperback
  • Language : Hindi
  • Edition : 2014
  • Pages : 128
  • Weight : 250 g.
  • Size : 8.4 x 5.4 x 0.4 inches
  • ISBN-10: 9350641976
  • ISBN-13: 978-9350641972
DESCRIPTION:
'फ़िराक़' साहब ने अनगिनत ग़ज़लें, नज़्मे, रुबाइयाँ, कतए इत्यादि लिखे है। समालोचक भी वह उच्चकोटि के थे लेकिन स्मरण वे सदा अपनी ग़ज़लों और ग़ज़लों के उन शे'रो के कारन किये जायेंगे जिनकी संख्या सेकड़ो तक पहोचती है।
$18
Mallika (Hindi Edition)
Mallika (Hindi Edition)
SPECIFICATION:
  • Publisher : Rajpal and Sons
  • By : Manisha Kulshreshtha
  • Cover : Paperback
  • Language : Hindi
  • Edition : 2019
  • Pages : 160
  • Weight : 200 g.
  • Size : 7.9 x 5.5 x 1.6 inches
  • ISBN-10: 938653469X
  • ISBN-13: 978-9386534699
DESCRIPTION:
मल्लिका आधुनिक हिन्दी के निर्माता भारतेन्दु हरिश्चन्द्र की वह प्रेमिका थी जिसके संबंध में इतिहास और साहित्य मौन है। भारतेन्दु के घर के पास रहने वाली बाल-विधवा, मल्लिका ने भारतेन्दु से हिन्दी पढ़ना-लिखना सीखकर बांग्ला के तीन उपन्यासों का हिन्दी में अनुवाद किया। उन्हीं अनुवादों ने भारतेन्दु को ‘उपन्यास’ विधा से परिचित करवाया और इसी से प्रेरणा पाकर वे आधुनिक हिन्दी के निर्माता बने। लेकिन भाग्य की ऐसी विडंबना कि मल्लिका ने जो स्वयं मौलिक उपन्यास लिखा, उसका कहीं कोई ज़िक्र तक नहीं मिलता; जबकि उनका वह उपन्यास हिन्दी का प्रथम उपन्यास माने जाने वाले, परीक्षागुरु, से पहले का है। इतिहास के धुंधलके से गल्प के सहारे मनीषा कुलश्रेष्ठ ने उसी विस्मृत और उपेक्षित नायिका को खोज निकाला है और उसके जीवन पर एक काल्पनिक जीवनीपरक उपन्यास रचा है। मनीषा कुलश्रेष्ठ एक सुपरिचित लेखिका हैं जो कथा साहित्य के कई महत्त्वपूर्ण सम्मान और फ़ैलोशिप प्राप्त कर चुकी हैं। इनके अब तक सात कहानी-संग्रह और चार उपन्यास प्रकाशित हो चुके हैं जिनमें शिगाफ़, पंचकन्या, स्वप्नपाश और किरदार उल्लेखनीय हैं। इनकी कई कहानियाँ विदेशी भाषाओं में भी अनूदित हो चुकी हैं। इनका संपर्क है |
$24
Meri Priya Kahaniyaan (Hindi Edition)
Meri Priya Kahaniyaan (Hindi Edition)
SPECIFICATION:
  • Publisher : Rajpal & Sons
  • By : Amrita Pritam
  • Cover : Paperback
  • Language : Hindi
  • Edition : 2015
  • Pages : 132
  • Weight : 200 g.
  • Size : 7.9 x 5.5 x 1.6 inches
  • ISBN-10: 9350641933
  • ISBN-13: 978-9350641934
$19
Kankal: Jaishankar Prasad
Kankal: Jaishankar Prasad
SPECIFICATION:
  • Publisher : Rajpal and Sons
  • By : Jaishankar Prasad
  • Cover : Paperback
  • Language : Hindi
  • Edition : 2015
  • Pages : 176
  • Weight : 250 g.
  • Size : 8.5 x 5.5 x 0.4 inches
  • ISBN-10: 9350643022
  • ISBN-13: 978-9350643020
DESCRIPTION:
जयशंकर प्रसाद बहुआयामी रचनाकार थे। जिनकी लेखन और रंगमंच दोनों पर अच्छी पकड़ थी। कवि, नाटककार, कहानीकार होने के साथ-साथ वह उच्चकोटि के उपन्यासकार भी थे। जयशंकर प्रसाद ने तीन उपन्यास लिखे, तितली, कंकाल और इरावती। अंतिम उपन्यास इरावती उनके निधन के कारण अधूरा रह गया। कंकाल में लेखक ने हिन्दू धर्म के ठेकेदारों की सच्चाई को उद्घाटित किया है। सत्य और मोक्ष की खोज में लगे धर्म के अनुयायी कैसे अपनी वासना में खुद फँस जाते हैं और औरों को इसका शिकार बनाते हैं। धार्मिक स्थानों के बंद दरवाज़ों के पीछे काम और वासना का यह खेल कैसे लोगों को, विशेषकर मासूम और निर्दोष लड़कियों की जि़ंदगी को तबाह कर देता है, इन सबका बहुत ही मार्मिक ताना-बाना बुना गया है इस उपन्यास में।
$19

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