Shrimad Valmikiya Ramayan Pratham aur Dwitiya Khand (Code 75 & 76)-श्रीमद वाल्मिकीय रामायण प्रथम एवं द्वितीय खंड (Hindi)

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SPECIFICATION:
  • Publisher : Gita Press Gorakhpur
  • By : Maharshi Valmiki
  • Cover : Paperback
  • Language : Hindi
  • Edition : 2017
  • Pages : 
  • Weight : 900 gm
  • Size : 29 x 20.4 x 4 cm
  • ASIN: B07QJ1BB88
DESCRIPTION:

श्रीमद वाल्मिकीय रामायण प्रथम एवं द्वितीय खंड - केवल हिंदी अनुवाद, सचित्र, गीताप्रेस गोरखपूर द्वारा प्रकाशित 

त्रेतायुग में महर्षि वाल्मीकि के श्रीमुख से साक्षात वेदों का ही श्रीमद्रामायण रूप में प्राकट्य हुआ, ऐसी आस्तिक जगत की मान्यता है। अतः श्रीमद्रामायण को वेदतुल्य प्रतिष्ठा प्राप्त है। धराधाम का आदिकाव्य होने से इस में भगवान के लोकपावन चरित्र की सर्वप्रथम वाङ्मयी परिक्रमा है। इसके एक-एक श्लोक में भगवान के दिव्य गुण, सत्य, सौहार्द्र, दया, क्षमा, मृदुता, धीरता, गम्भीरता, ज्ञान, पराक्रम, प्रज्ञा-रंजकता, गुरुभक्ति, मैत्री, करुणा, शरणागत-वत्सलता जैसे अनन्त पुष्पों की दिव्य सुगन्ध है। मूल के साथ सरस हिन्दी अनुवाद में दो खण्डों में उपलब्ध। सचित्र, सजिल्द। Valmiki Ramayan is one of the world's most remarkable classics and excels in its moral appeal. It is full of lessons for all and deserves to be read with interest by all lovers of healthy literature. It is noted for its poetic excellence and is the oldest specimen of epic poetry. It stands equal in rank to the Vedas. Valmiki Ramayan is available in two volumes with text and Hindi translation. Hard-bound with illustration.

Description

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  • Publisher : Gita Press Gorakhpur
  • By : Maharshi Valmiki
  • Cover : Paperback
  • Language : Hindi
  • Edition : 2017
  • Pages : 
  • Weight : 900 gm
  • Size : 29 x 20.4 x 4 cm
  • ASIN: B07QJ1BB88
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श्रीमद वाल्मिकीय रामायण प्रथम एवं द्वितीय खंड - केवल हिंदी अनुवाद, सचित्र, गीताप्रेस गोरखपूर द्वारा प्रकाशित 

त्रेतायुग में महर्षि वाल्मीकि के श्रीमुख से साक्षात वेदों का ही श्रीमद्रामायण रूप में प्राकट्य हुआ, ऐसी आस्तिक जगत की मान्यता है। अतः श्रीमद्रामायण को वेदतुल्य प्रतिष्ठा प्राप्त है। धराधाम का आदिकाव्य होने से इस में भगवान के लोकपावन चरित्र की सर्वप्रथम वाङ्मयी परिक्रमा है। इसके एक-एक श्लोक में भगवान के दिव्य गुण, सत्य, सौहार्द्र, दया, क्षमा, मृदुता, धीरता, गम्भीरता, ज्ञान, पराक्रम, प्रज्ञा-रंजकता, गुरुभक्ति, मैत्री, करुणा, शरणागत-वत्सलता जैसे अनन्त पुष्पों की दिव्य सुगन्ध है। मूल के साथ सरस हिन्दी अनुवाद में दो खण्डों में उपलब्ध। सचित्र, सजिल्द। Valmiki Ramayan is one of the world's most remarkable classics and excels in its moral appeal. It is full of lessons for all and deserves to be read with interest by all lovers of healthy literature. It is noted for its poetic excellence and is the oldest specimen of epic poetry. It stands equal in rank to the Vedas. Valmiki Ramayan is available in two volumes with text and Hindi translation. Hard-bound with illustration.

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