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Kaali Salwar Aur Anya KahaniyaanKaali Salwar Aur Anya Kahaniyaan
Kaali Salwar Aur Anya Kahaniyaan
SPECIFICATION:
  • Publisher : Rajpal and Sons
  • By: Saadat Hasan Manto (Author)
  • Binding :Paperback
  • Language : Hindi
  • Edition :2016
  • Pages: 160 pages
  • Size : 20 x 14 x 4 cm
  • ISBN-10:  9350643820
  • ISBN-13 :9789350643822

DESCRIPTION: 

अगर आपको मेरी कहानियाँ अश्लील या गंदी लगती हैं, तो जिस समाज में आप रह रहे हैं, वह अश्लील और गंदा है। मेरी कहानियाँ तो केवल सच दर्शाती हैं... अक्सर ऐसा कहते थे मंटो जब उन पर अश्लीलता के इल्ज़ाम लगते। बेबाक सच लिखने वाले मंटो बहुत से ऐसे मुद्दों पर भी लिखते जिन्हें उस समय के समाज में बंद दरवाज़ों के पीछे दबा कर, छुपा कर रखा जाता था। सच सामने लाने के साथ, कहानी कहने की अपनी बेमिसाल अदा और उर्दू ज़बान पर बेजोड़ पकड़ ने सआदत हसन मंटो को कहानी का बेताज बादशाह बना दिया। मात्र 43 सालों की ज़िंदगी में उन्होंने 200 से अधिक कहानियाँ, एक उपन्यास, तीन निबन्ध-संग्रह और अनेक नाटक, रेडियो और फ़िल्म पटकथाएँ लिखीं। फ्रेंच और रूसी लेखकों से प्रभावित, वामपंथी सोच वाले मंटो के लेखन में सच्चाई को ऐसे पेश करने की ताकत है जो लंबे अर्से तक पाठक के दिलोदिमाग पर अपनी पकड़ बनाए रखती है। 2012 में पूरे हिन्दुस्तान में मनाई गई मंटो की जन्म-शताब्दी इस बात का सबूत है कि मंटो आज भी अपने पाठकों और प्रशंसकों के लिए ज़िंदा हैं।

                          $15
                          Kaali Salwar Aur Anya KahaniyaanKaali Salwar Aur Anya Kahaniyaan
                          Kaali Salwar Aur Anya Kahaniyaan
                          SPECIFICATION:
                          • Publisher : Rajpal and Sons
                          • By: Saadat Hasan Manto (Author)
                          • Binding :Hardcover
                          • Language : Hindi
                          • Edition :2016
                          • Pages: 160 pages
                          • Size : 20 x 14 x 4 cm
                          • ISBN-10: 9350643839
                          • ISBN-13 :9789350643839

                          DESCRIPTION: 

                          अगर आपको मेरी कहानियाँ अश्लील या गंदी लगती हैं, तो जिस समाज में आप रह रहे हैं, वह अश्लील और गंदा है। मेरी कहानियाँ तो केवल सच दर्शाती हैं... अक्सर ऐसा कहते थे मंटो जब उन पर अश्लीलता के इल्ज़ाम लगते। बेबाक सच लिखने वाले मंटो बहुत से ऐसे मुद्दों पर भी लिखते जिन्हें उस समय के समाज में बंद दरवाज़ों के पीछे दबा कर, छुपा कर रखा जाता था। सच सामने लाने के साथ, कहानी कहने की अपनी बेमिसाल अदा और उर्दू ज़बान पर बेजोड़ पकड़ ने सआदत हसन मंटो को कहानी का बेताज बादशाह बना दिया। मात्र 43 सालों की ज़िंदगी में उन्होंने 200 से अधिक कहानियाँ, एक उपन्यास, तीन निबन्ध-संग्रह और अनेक नाटक, रेडियो और फ़िल्म पटकथाएँ लिखीं। फ्रेंच और रूसी लेखकों से प्रभावित, वामपंथी सोच वाले मंटो के लेखन में सच्चाई को ऐसे पेश करने की ताकत है जो लंबे अर्से तक पाठक के दिलोदिमाग पर अपनी पकड़ बनाए रखती है। 2012 में पूरे हिन्दुस्तान में मनाई गई मंटो की जन्म-शताब्दी इस बात का सबूत है कि मंटो आज भी अपने पाठकों और प्रशंसकों के लिए ज़िंदा हैं।

                                                  $30
                                                  Kaali Salwar Aur Anya Kahaniyaan (Hindi Edition)
                                                  Kaali Salwar Aur Anya Kahaniyaan (Hindi Edition)
                                                  SPECIFICATION:
                                                  • Publisher : Rajpal and Sons
                                                  • By : Saadat Hasan Manto
                                                  • Cover : Paperback
                                                  • Language : Hindi
                                                  • Edition : 2016
                                                  • Pages : 159
                                                  • Weight : 360 g.
                                                  • Size : 7.9 x 5.5 x 1.6 inches
                                                  • ISBN-10: 9350643820
                                                  • ISBN-13: 978-9350643822
                                                  DESCRIPTION:

                                                  अगर आपको मेरी कहनियाँ अश्लील या गन्दी लगती है , तो जिस समाज में आप रह रहे है , वह अशलील और गन्दा है . मेरी कहनियाँ तो केवल सच दर्शाती है .....अक्शर ऐसा कहते थे मंटो जब उन पर अश्लीलता के इल्जाम लगते . बेबाक सच लिखने वाले मंटो बहुत से ऐसे मुदो पर भी लिखते जिन्हें उस समय के समाज में बंद दरवाजो के पीछे दबा कर, छुपा कर रखा जाता था . सच सामने लाने के साथ, कहानी कहने की अपनी बेमिसाल अदा और उर्दू जबान पर बेजोड़ पकड़ ने सआदत हसन मंटो को कहानी का बेताज बादशाह बना दिया . मात्र 43 सालो की जिन्दगी में उन्होंने 200 से अधिक कहानियाँ , एक उपन्यास , तीन निबन्ध संग्रह और अनेक नाटक ,रेडियो और फिल्म पटकथा लिखी . फ्रेंच और रूसी लेखको से प्रभावित , वामपंथी सोच वाले मंटो के लेखन में सचाई को पेश करने की ताकत है जो लम्बे अर्से तक पाठक के दिलो दिमाग पर अपनी पकड़ बनाए रखती है २०१२ मे पूरे हिन्दुतान में मनाई गयी मंटो की जन्म -शताब्दी इस बात का सबूत है की मंटो आज भी अपने पाठकों और प्रशंसकों के लिए जिन्दा है .
                                                  $21
                                                  Kaalsarp Dosh Nivaran YantraKaalsarp Dosh Nivaran Yantra
                                                  Kaalsarp Dosh Nivaran Yantra
                                                  Specification
                                                  • Product Code :5164
                                                  • Material: Copper
                                                  • Size: 9.53 cm, 9.53 cm, 0.51 cm
                                                  Description
                                                  $21
                                                  Kab Tak PukaroonKab Tak Pukaroon
                                                  Kab Tak Pukaroon
                                                  SPECIFICATION:
                                                  • Publisher : Rajpal and Sons 
                                                  • By:  Rangey Raghav (Author)
                                                  • Binding :Paperback
                                                  • Language: Hindi
                                                  • Edition :2017
                                                  • Pages: 440 pages
                                                  • Size : 20 x 14 x 4 cm
                                                  • ISBN-10: 93506403510
                                                  • ISBN-13:9789350640357

                                                  DESCRIPTION: 

                                                  रांगेय राघव हिन्दी के उन प्रतिभाशाली लेखकों में से हैं जिन्होंने साहित्य के विविध अंगों की समृद्धि के लिए अपनी कुशल लेखनी से अनेक महत्त्वपूर्ण ग्रन्थों का सृजन किया। उनकी कविता, कहानी, नाटक, उपन्यास, आलोचना तथा इतिहास आदि विषयक अनेक उपादेय कृतियां इस कथन की साक्षी हैं। मूलतः दाक्षिणात्य होते हुए भी उन्होंने जिस जागरूक प्रतिभा, योग्यता तथा कुशलता से हिन्दी साहित्य के श्री-वर्द्धन में अपना अविस्मरणीय योगदान दिया, वह इतिहास के पन्नों में दर्ज है। ‘कब तक पुकारूं’ उनकी प्रतिभा और लेखन-क्षमता को अभिषिक्त करने वाली जीवंत औपन्यासिक रचना है। इसमें उन्होंने समाज के सर्वथा उपेक्षित उस वर्ग का चित्रण अत्यन्त सरल और रोचक शैली में प्रस्तुत किया है जिसे सभ्य समाज ‘नट’ या ‘करनट’ कहकर पुकारता है। ‘कब तक पुकारूं’ की गणना हिन्दी के कालजयी साहित्य में की जाती है।

                                                                          $30
                                                                          Kabir Speaks [Hardcover] D.N. Harjani
                                                                          Kabir Speaks [Hardcover] D.N. Harjani
                                                                          $19.08
                                                                          Kabir, Kabir: The life and work of the early modern poet-philosopher
                                                                          Kabir, Kabir: The life and work of the early modern poet-philosopher
                                                                          SPECIFICATION:
                                                                          • Publisher : ‎ Westland
                                                                          • By : Purushottam Agrawal
                                                                          • Cover : Hardcover
                                                                          • Language : English
                                                                          • Edition : 2021
                                                                          • Pages : 284 pages
                                                                          • Weight : 400 g
                                                                          • Size : 14 x 14 x 21.6 cm
                                                                          • ISBN-10 : 939067915X
                                                                          • ISBN-13 : 978-9390679157
                                                                          DESCRIPTION: 

                                                                          As the right wing tries to claim Kabir for itself, while other conservatives disown him and yet others portray him as a secular idol beyond religion, the poet has never been so misunderstood. Coming from the Nirgun bhakti tradition, the words of this fifteenth-century poet have the power to reach beyond time and speak to us today. Was he a Hindu or Muslim or was he beyond religion? Did he try to cultivate a new faith or did he eschew organised religion altogether? Was his modernity an exception or a reflection of the times he lived in? What does Kabir’s life and poetry tell us about this nation’s past and present? In this rare appraisal of Kabir’s writings and his life, Purushottam Agarwal approaches this timeless poet-revolutionary with little preconceptions, presenting him the way the poet wanted to be seen, rather than what his followers and fans want to see in him.

                                                                          $32
                                                                          Kadambari of Bana (Purvabhaga Complete)
                                                                          Kadambari of Bana (Purvabhaga Complete)
                                                                          "Bana's Kadambari is often appointed as a text-book in the Indian Universities, and owing to the peculiar characteristics of its style, the students often find it is a hard task to translate the intricate passages in it, in spite of the help they receive in the class-room from their Professors. Some editors try to satisfy the needs of their readers by issuing voluminous notes, whose very extent, however, frightens away the student; at any rate it becomes a tire-some task to wade through a bulky book for obtaining light on one's own particular difficulty. Moreover, only a literal and complete translation can solve many of the simpler difficulties of the ordinary student as regards the meanings of individual words and constructions of sentences, which the annotator may have passed over as being easy.

                                                                          The present translation has been prepared at the request of many students who require some such help. The translation, here offered, is complete, without the omission of a single word or phrase; it is as close as the idiom of the language permits; and particular care has been bestowed upon passages involving puns and suggested senses."
                                                                          $36
                                                                          Kadhai Cooking
                                                                          Kadhai Cooking
                                                                          SPECIFICATION:
                                                                          • Publisher : Rajpal and Sons
                                                                          • By: Sanjeev Kapoor (Author)
                                                                          • Binding : Paperback
                                                                          • Language : Hindi
                                                                          • Edition :2011
                                                                          • Pages: 96 pages
                                                                          • Size : 20 x 14 x 4 cm
                                                                          • ISBN-10: 8170289386
                                                                          • ISBN-13 :9788170289388

                                                                          DESCRIPTION: 

                                                                          मास्टर शेफ संजीव कपूर भारत में पाककला के सर्वोच्च शिखर पर बैठे हैं। उनका 24×7 टीवी चैनल फूडफूड, भारत और विदेशों में उनके रेस्त्रांओं की श्रृंखला और पाककला पर उनकी कई लोकप्रिय पुस्तकें इसका प्रमाण हैं कि वे भारत के सबसे लोकप्रिय और प्रतिष्ठित शेफ हैं। उनकी वेबसाइट www.sanjeevkapoor.com विभिन्न पकवानों और पाककला पर व्यापक और विस्तृत जानकारी का ख़ज़ाना है। ‘

                                                                                                  $10
                                                                                                  Kagaz Ki KashtiKagaz Ki Kashti
                                                                                                  Kagaz Ki Kashti
                                                                                                  SPECIFICATION:
                                                                                                  • Publisher : Rajpal and Sons
                                                                                                  • By: Sudarshan Faakir(Author)
                                                                                                  • Binding :Paperback
                                                                                                  • Language : Hindi
                                                                                                  • Edition :2019
                                                                                                  • Pages: 176 pages
                                                                                                  • Size : 20 x 14 x 4 cm
                                                                                                  • ISBN-10: 9389373093
                                                                                                  • ISBN-13 :9789389373097

                                                                                                  DESCRIPTION: 

                                                                                                  वो कागज़ की कश्ती, वो बारिश का पानी’ जैसी मशहूर ग़ज़लें और प्रसिद्ध रामधुन ‘हे राम’ के रचयिता की यह इकलौती किताब है जिसमें उनकी ग़ज़लों, गीतों और नज़्मों को सम्मिलित किया गया है। सुदर्शन फ़ाकिर की ग़ज़लों और गीतों को बेगम अख़्तर, मोहम्मद रफ़ी, आशा भोंसले, पंकज उधास और अन्य जाने-माने गायकों ने अपनी आवाज़ दी है। लेकिन उनकी सबसे ज़्यादा ग़ज़लों और गीतों को जगजीत सिंह ने ही गाया। सुदर्शन फ़ाकिर और जगजीत सिंह न केवल अच्छे दोस्त थे बल्कि एक दूसरे के पूरक भी थे। सुदर्शन फाकिर ने कई फ़िल्मों के लिए गीत भी लिखे और ‘दूरियाँ’ फिल्म के उनके गीत ‘मेरे घर आना ज़िन्दगी...’ को 1980 में ‘फिल्म वल्र्ड अवार्ड’ से सम्मानित किया गया। एनसीसी में गाये जाने वाले गीत ‘हम सब भारतीय हैं’ भी उन्हीं का लिखा हुआ है। 1934 में फ़िरोज़पुर में जन्मे सुदर्शन फ़ाकिर ने डीएवी कॉलेज जालंधर से अपनी पढ़ाई पूरी की। उन्हें कॉलेज के दिनों से ही रंगमंच, कविता और शायरी का शौक था। कुछ वर्ष ऑल इंडिया रेडियो जालंधर में कार्यरत रहने के बाद वे बेगम अख़्तर के कहने पर मुंबई चले गये। लेकिन उनका परिवार जालंधर में ही रहा और वे दोनों शहरों में लगातार आते-जाते रहे। सुदर्शन फ़ाकिर एकान्तप्रिय और सकुंचित स्वभाव के थे और बहुत कम लोगों से खुलकर बात करते थे। शौहरत से दूरी बनाये रखने वाले सुदर्शन फ़ाकिर हमेशा गुमनामी के अंधेरे में ही रहे और शायद इसीलिए उनके जीवनकाल में उनकी कोई किताब सामने नहीं आई। 12 फरवरी 2008 को सुदर्शन फ़ाकिर की कलम हमेशा के लिए रुक गयी।

                                                                                                                          $30
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                                                                                                                          Kahin Tum Bhatak Na Jao
                                                                                                                          SPECIFICATION:
                                                                                                                          • Publisher : Rajpal and Sons
                                                                                                                          • By: Patrick Modiano (Author)
                                                                                                                          • Binding :Paperback
                                                                                                                          • Language : Hindi
                                                                                                                          • Edition :2018
                                                                                                                          • Pages: 112 pages
                                                                                                                          • Size : 20 x 14 x 4 cm
                                                                                                                          • ISBN-10: 9386534622
                                                                                                                          • ISBN-13: 9789386534620

                                                                                                                          DESCRIPTION: 

                                                                                                                          जाँ दारागान एकान्त-पसन्द लेखक है जो पेरिस के शोरोगुल से दूर शान्ति से अपना जीवन व्यतीत कर रहा है। उसके शान्तमय जीवन में ऐसी उथल-पुथल मच जाती है जब सितम्बर की एक दोपहर को ओतोलीनी नामक एक व्यक्ति का फ़ोन आता है। ओतोलीनी के हाथ आयी है जाँ दारागान की पुरानी नोटबुक, जिसमें एक विशेष व्यक्ति का नाम दर्ज है, जिसके बारे में ओतोलीनी पूछताछ करना चाहता है। लेकिन लाख कोशिश करने पर भी दारागान, ओतोलीनी को उस व्यक्ति के बारे में कुछ बता नहीं पाता लेकिन ओतोलीनी के लिए उस व्यक्ति को ढूँढना बहुत ज़रूरी है। दारागान उस व्यक्ति की तलाश में ओतोलीनी के साथ लग जाता है और वहीं से उसकी ज़िन्दगी में एक अलग मोड़ आता है। इस कहानी की अपनी ही एक रहस्यमय लय और ताल है, पाठक जैसे-जैसे इसे पढ़ता है वह इन पात्रों की ज़िन्दगी में डूबता जाता है। 2014 में साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित विश्वस्तरीय फ्रांसीसी लेखक, पाट्रिक मोदियानो, की गिनती इक्कीसवीं सदी के महत्त्वपूर्ण लेखकों में की जाती है। अब तक पाट्रिक मोदियानो की तीस से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। वे उन गिने-चुने लेखकों में से हैं जिनको आलोचकों और पाठकों, दोनों के बीच समर्थन और लोकप्रियता मिली है। फ्रांस में उन्हें साहित्य में योगदान के लिए 2010 में Prix Mondial Cino Del Duca, पुरस्कार 2012 में Austrian State Prize for European Literature से सम्मानित किया गया। उनकी कृतियाँ विश्व की 30 भाषाओं में अनूदित हो चुकी हैं।

                                                                                                                                                  $15
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                                                                                                                                                  Kahin Tum Bhatak Na Jao
                                                                                                                                                  SPECIFICATION:
                                                                                                                                                  • Publisher : Rajpal and Sons
                                                                                                                                                  • By: Patrick Modiano (Author)
                                                                                                                                                  • Binding :Hardcover
                                                                                                                                                  • Language : Hindi
                                                                                                                                                  • Edition :2018
                                                                                                                                                  • Pages: 112 pages
                                                                                                                                                  • Size : 20 x 14 x 4 cm
                                                                                                                                                  • ISBN-10: 9386534630
                                                                                                                                                  • ISBN-13: 9789386534637

                                                                                                                                                  DESCRIPTION: 

                                                                                                                                                  जाँ दारागान एकान्त-पसन्द लेखक है जो पेरिस के शोरोगुल से दूर शान्ति से अपना जीवन व्यतीत कर रहा है। उसके शान्तमय जीवन में ऐसी उथल-पुथल मच जाती है जब सितम्बर की एक दोपहर को ओतोलीनी नामक एक व्यक्ति का फ़ोन आता है। ओतोलीनी के हाथ आयी है जाँ दारागान की पुरानी नोटबुक, जिसमें एक विशेष व्यक्ति का नाम दर्ज है, जिसके बारे में ओतोलीनी पूछताछ करना चाहता है। लेकिन लाख कोशिश करने पर भी दारागान, ओतोलीनी को उस व्यक्ति के बारे में कुछ बता नहीं पाता लेकिन ओतोलीनी के लिए उस व्यक्ति को ढूँढना बहुत ज़रूरी है। दारागान उस व्यक्ति की तलाश में ओतोलीनी के साथ लग जाता है और वहीं से उसकी ज़िन्दगी में एक अलग मोड़ आता है। इस कहानी की अपनी ही एक रहस्यमय लय और ताल है, पाठक जैसे-जैसे इसे पढ़ता है वह इन पात्रों की ज़िन्दगी में डूबता जाता है। 2014 में साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित विश्वस्तरीय फ्रांसीसी लेखक, पाट्रिक मोदियानो, की गिनती इक्कीसवीं सदी के महत्त्वपूर्ण लेखकों में की जाती है। अब तक पाट्रिक मोदियानो की तीस से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। वे उन गिने-चुने लेखकों में से हैं जिनको आलोचकों और पाठकों, दोनों के बीच समर्थन और लोकप्रियता मिली है। फ्रांस में उन्हें साहित्य में योगदान के लिए 2010 में Prix Mondial Cino Del Duca, पुरस्कार 2012 में Austrian State Prize for European Literature से सम्मानित किया गया। उनकी कृतियाँ विश्व की 30 भाषाओं में अनूदित हो चुकी हैं।

                                                                                                                                                                          $17

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