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SPECIFICATION:
- Publisher : CHAUKHAMBA SURBHARATI PRAKASHAN
- By : Jagdish Chandra Mishra
- Cover : Paperback
- Language : HINDI
- Edition : 2012
- Pages : 807
- Weight : 500 gm.
- Size : 8.5 X 5.5 INCH
- ISBN-10 : 938032622X
- ISBN-13 : 9789380326221
DESCRIPTION:
An authentic new edition of Indian Philosophy written by Dr. Jagadish Chandra Mishra
SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Sarvapalli Radhakrishnan (Author)
- Binding :Hardcover
- Language: Hindi
- Edition :2017
- Pages: 600 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10: 8170281873
- ISBN-13:9788170281870
DESCRIPTION:
महान् भारतीय दार्शनिक और पूर्व राष्ट्रपति डा. राधाकृष्णन ने भारतीय दर्शन की तर्क और विज्ञान के आधार पर व्याख्या की और उसे पूरी दुनिया तक पहुँचाया। उनका विश्वविख्यात ग्रंथ इंडियन फिलासफी वर्षों तक आक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में पाठ्यक्रम के रूप में पढ़ाया जाता रहा। प्रस्तुत ग्रंथ इंडियन फिलासफी का प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद है। वैदिक काल से लेकर आज तक भारतीय दर्शन ने जो पड़ाव पार किए हैं, इस ग्रंथ में उन सभी का क्रमिक विवेचन किया गया है। इसकी विशेषता यह है कि भारतीय दर्शन के विभिन्न सिद्धांतों की तुलना इसमें दुनिया के विभिन्न मतों और दर्शनों से की गई है। विषय के अत्यंत गूढ़ और गहन होने के बावजूद प्रस्तुत ग्रंथ की भाषा सहज और सरल है।

SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Sarvapalli Radhakrishnan (Author)
- Binding :Hardcover
- Language: Hindi
- Edition :2018
- Pages: 696 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10: 8170281881
- ISBN-13:9788170281887
DESCRIPTION:
महान् भारतीय दार्शनिक और पूर्व राष्ट्रपति डा. राधाकृष्णन ने भारतीय दर्शन की तर्क और विज्ञान के आधार पर व्याख्या की और उसे पूरी दुनिया तक पहुँचाया। उनका विश्वविख्यात ग्रंथ इंडियन फिलासफी वर्षों तक आक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में पाठ्यक्रम के रूप में पढ़ाया जाता रहा। प्रस्तुत ग्रंथ इंडियन फिलासफी का प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद है। वैदिक काल से लेकर आज तक भारतीय दर्शन ने जो पड़ाव पार किए हैं, इस ग्रंथ में उन सभी का क्रमिक विवेचन किया गया है। इसकी विशेषता यह है कि भारतीय दर्शन के विभिन्न सिद्धांतों की तुलना इसमें दुनिया के विभिन्न मतों और दर्शनों से की गई है। विषय के अत्यंत गूढ़ और गहन होने के बावजूद प्रस्तुत ग्रंथ की भाषा सहज और सरल है।

SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Devdutt Pattanaik (Author)
- Binding :Paperback
- Language : Hindi
- Edition :2015
- Pages: 208 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10: 9350642557
- ISBN-13: 9789350642559
DESCRIPTION:
रक्तरंजित और विकराल रूप वाली काली से लेकर विध्नहारी गणेश तक भारतीय आध्यात्मिक जगत ऐसे पात्रों से आबाद है, जिनका कोई प्रतिरूप दुनिया के किसी भी और देश में नहीं मिलता। एक रहस्यमय और अनोखी दुनिया से रू-ब-रू कराती है यह पुस्तक और पौराणिक कथाएँ प्राचीन पुराकथाओं में इन पात्रों की समृद्ध बुनावट को रेशा-दर-रेशा खोलती है और यह दिखाती है कि भारतीय पुराकथाएँ तभी बेहतर तौर पर समझी जा सकती हैं जब हम पश्चिमी, एकेश्वरवादी धारणा से हटकर हिन्दू परम्पराओं के देवी-देवता बहुल संसार में प्रवेश करें। हज़ारों वर्षों के दौरान भारतीय आख्यानों और उनकी व्याख्या पर नज़र डालती हुई भारतीय पौराणिक कथाएँ यह प्रदर्शित करती हैं कि कैसे इन कथाओं में वर्णित रीति-रिवाज़, कर्मकांड और कला आज भी जीवन्त बनी हुई है और पीढ़ी को अपनी ओर आकर्षित करती है।

SPECIFICATION:
- Publisher :Rajpal and Sons
- By: Amartya Sen (Author)
- Binding :Hardcover
- Language: Hindi
- Edition :2014
- Pages: 308 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10::8170283620
- ISBN-13: 9788170283621
DESCRIPTION:
भारत अत्यन्त विशाल देश है और इसके प्रदेश आर्थिक विकास तथा उसके कारकों की दृष्टि से एक दूसरे से बहुत भिन्न हैं। प्रत्येक प्रदेश की विकास योजनाओं को उसकी पृष्ठभूमि और परिप्रेक्ष्य में ही परखा जाना चाहिए। यह पुस्तक उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और केरल के आर्थिक अध्ययन इस दृष्टि से प्रस्तुत करती है कि अन्य प्रदेश उनके आईने में विकास की अपनी समस्याओं को न केवल रेखांकित कर सकें बल्कि उनके हल भी ढूँढ़ सकें। ‘‘अमर्त्य सेन की महत्त्वपूर्ण कृतियाँ जाने-माने प्रकाशक राजपाल एण्ड सन्ज़ के उद्यम से हिन्दी भाषा में आ रही हैं। इस प्रयास का महत्त्व यह है कि जिस बहुसंख्यक गरीब और गैर-अमीर मध्यमवर्गीय जनता के जीवन-परिवर्तन को इन विरले अर्थशास्त्रियों के विचार-सरोकार समर्पित हैं-अब उसकी एक बड़ी संख्या को ये उपलब्ध हैं। वे उन पर खुलकर और सोच-समझकर बहस कर सकते हैं और जब भी कोई सरकार जन-हितकारी आर्थिक नीतियों की घोषणा और जन-जीवन में बदलाव के दावे करती है तो वे उन्हें आंक, तोल कर परख सकते हैं। जो ठीक है उससे सहमति और जो गलत है, उस पर विरोध के स्वर उठा सकते हैं। नयी शताब्दी और सहस्राब्दी के भारतीयों के लिए अर्थ जगत और अर्थनीतियों के प्रति जागरूक होना और एक सक्रिय आर्थिक मानव की भूमिका निभाना कत्र्तव्य भी है और आवश्यकता भी।’’-दैनिक हिन्दुस्तान। ‘‘शोधकर्ताओं, विकास कार्यकर्ताओं तथा स्वैच्छिक संस्थाओं के लिए अत्यन्त उपयोगी...सरल भाषा के कारण सामान्य पाठक के लिए भी बोधगम्य’’-बिज़नैस स्टैन्डर्ड

SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Sarvapalli Radhakrishnan (Author)
- Binding :Hardcover
- Language: Hindi
- Edition :2019
- Pages: 104 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10: 9350640775
- ISBN-13:9789350640777
DESCRIPTION:
डा. राधाकृष्णन एक महान दार्शनिक और विचारक थे। भारतीय संस्कृति के वे मूर्धन्य व्याख्याता तथा उसके समर्थक थे। भारतीय संस्कृति का वास्तविक स्वरूप उन्होंने विश्व के सामने प्रस्तुत करने का प्रयत्न किया। भारतीय संस्कृति की प्रमुख विशेषता यह है कि वह मानव के उद्बोधन का मार्ग प्रशस्त करती है। भारतीय संस्कृति धर्म को जीवन से अलग करने की बात नहीं मानती, अपितु वह मानती है कि धर्म ही जीवन की ओर ले जाने वाला मार्ग है और उसे बताती है कि उससे किसी को भयभीत होने की आवश्यकता नहीं-क्योंकि मानव जिन विचारों से भयभीत होता है, वे तो स्वयं उसके अन्तर में छिपे हुए हैं। मानव को उन्हीं पर विजय प्राप्त करनी है। भारतीय संस्कृति यह भी नहीं कहती कि मानव की महत्ता कभी न गिरने में है, वरन् मानव की महत्ता इस बात में है कि वह गिरने पर भी उठकर खड़ा होने में समर्थ है। उसकी महानता इस बात से आंकी जाती है कि वह अपनी दुर्बलताओं पर प्रभुत्व पाने में कहाँ तक समर्थ है।

SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Sanjeev Kapoor (Author)
- Binding : Hardcover
- Language : Hindi
- Edition :2013
- Pages: 96 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10: 9350640066
- ISBN-13 :9789350640067
DESCRIPTION:

SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Chitra Garg (Author)
- Binding : Hardcover
- Language : Hindi
- Edition :2018
- Pages: 432 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10: 9350640414
- ISBN-13 :9789350640418
DESCRIPTION:
राजनीति, कला, खेल-कूद, विज्ञान, समाज-सेवा सभी क्षेत्रों में भारत की महिलाओं ने अपने योगदान की अनूठी छाप छोड़ी है। इंदिरा गांधी से इंदिरा नूयी तक, सरोजिनी नायडू से सायना नेहवाल तक, कमला देवी चट्टोपाध्याय से कल्पना चावला तक, अरुणा आसफ़ अली से अरुणा राय तक, ये सभी भारतीय महिलाएं अपने अलग-अलग कार्यक्षेत्रों में सफलता के शिखर तक पहुँची हैं और ऐसी ही उन चुनिंदा भारतीय महिलाओं के जीवन परिचय इस पुस्तक में प्रस्तुत हैं।

SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Alok Gupta(Author)
- Binding : Hardcover
- Language : Hindi
- Edition :2012
- Pages:224 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10: 8170289084
- ISBN-13 :9788170289081
DESCRIPTION:
‘‘भारतीय उपन्यास को परिभाषित करने के मूल में एक वह किसान जो उपेक्षित, पीड़ित है जिसे साहित्य में स्थान ही नहीं मिला था वह पहली बार नायक बना। हीरो बना प्रेमचन्द के हाथों और दूसरी ओर, वह जो नारी हाशिए पर थी उपन्यास विधा में समस्त संवेदनाओं का केन्द्र बनी। इन दोनों के साथ भारतीय उपन्यास ने वह रूप प्राप्त किया जहाँ इन उपन्यासों में हम भारतीय नारी को पहचान सकते हैं, भारतीय मनुष्य को पहचान सकते हैं।’’ - नामवर सिंह ‘‘हिन्दू समाज ने जब पश्चिमकाल मूल्यों को स्वीकार किया तब आर्थिक व्यवस्था को छोड़कर बाकी सारी व्यवस्थाएँ विकसित मूल्यों के अनुसार रची गईं। व्यापारी अंग्रेज़ संस्कृति यहाँ की आर्थिक व्यवस्था के शोषण के लिए ही आई हुई थी इसलिए सच्चाई यह है कि उन्होंने अन्य सांस्कृतिक व्यवस्थाओं को तो सुधारा किन्तु आर्थिक व्यवस्था को पुरानी मध्ययुगीन ही रखा।’’-भालचन्द्र नेमाड़े ‘‘शायद यह कहना समीचीन होगा कि भारतीयता हड़प्पा और भारतीय-आर्यों की सभ्यताओं की पारस्परिक अंतःक्रिया से जन्मी। भारतीय साहित्य भारतीयता के कलात्मक स्फुरण (उत्प्रेरणा) का पुनःसृजन है। इस साहित्य में न केवल दैनन्दिन जीवन की सच्चाइयाँ, बल्कि दर्शन, एक दृष्टिकोण, उनके धार्मिक विधि-विधाओं और कई दूसरी बातों में बिम्बित विशिष्ट मूल्य प्रतिबिम्बित होते हैं।’’ - तकषि शिवशंकर पिल्लै

SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Sanjeev Kapoor (Author)
- Binding : Hardcover
- Language : Hindi
- Edition :2013
- Pages: 124 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10: 93506400410
- ISBN-13 :9789350640043
DESCRIPTION:
SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Kamleshwar (Author)
- Binding : Hardcover
- Language : Hindi
- Edition :2014
- Pages: 100 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10: 8170285984
- ISBN-13 : 9788170285984
DESCRIPTION:
पिछले दिनों कमलेश्वर को पाकिस्तान जाने का अवसर मिला लेखकों के सम्मेलन में। वहाँ रहकर, छोटे-बड़े, सभी व्यक्तियों से मिलकर, पाकिस्तानी लेखकों और लेखिकाओं से खुले दिल से बातें करके, वहाँ की सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति को देख-भाल कर जो अनुभव उन्होंने प्राप्त किए, उन्हें अपने खास अन्दाज़ में लिखा है। पाकिस्तान आज एक कठिन दौर से गुजर रहा है। अनेक विरोधाभासों, विषमताओं और विसंगतियों में लोग जी रहे हैं। जहाँ एक ओर गरीबों की पराकाष्ठा है तो दूसरी ओर अमीरी और जागीरदारी की। एक ओर सरकारी तौर पर शराबबन्दी है तो दूसरी ओर अमीरों के घर-घर में मयखाने खुले हैं। इन्हें पढ़कर आज के पाकिस्तान का सजीव चित्र आपके सामने आएगा। इस पुस्तक का एक विशेष प्रसंग है उन कैदियों के पत्र जो उन्होंने कमलेश्वर को लिखे। जो हिन्दुस्तान और पाकिस्तान के जेलों में कई वर्षों से बन्द हैं।
SPECIFICATION:
- Publisher : Gurjar Sahitya Prakashan
- By : Dhoomketu
- Cover : Paperback
- Language : Gujarati
- Edition : 2017
- Pages : 248
- Weight : 300 g.
- Size : 8.3 x 5.7 x 0.7 inches
- ISBN-10: 9351622924
- ISBN-13: 978-9351622925

SPECIFICATION:
- Publisher : Yuva Upnishad Publication
- By : Ajay Patel (Author), Sanjay Paghdal (Author), Jignesh Gadhiya (Author), Yuva
- Upnishad Publication (Contributor)
- Cover : Paperback
- Language : Gujarati
- Edition : 2020
- Pages : 964
- Weight : 1.570 kg.
- Size : 24.6 x 17.8 x 4.2 cm
- ISBN-10 : 8194765749
- ISBN-13 : 978-8194765745
SPECIFICATION:
- Publisher : D. K. Printworld Pvt. Ltd
- By : Gian Giuseppe Filippi
- Cover : Hardcover
- Language : Hindi
- Edition : 2014
- Pages : 186
- Weight : 635 gm.
- Size : 9 x 5.9 x 1.1 inches
- ISBN-10 : 8124603138
- ISBN-13 : 978-8124603130
DESCRIPTION:
Yama, in Hindu mythology, is the eschatologist and god of death. And is, thus, dreaded. Even in today s India, there is a fearful hesitancy, if not conscious avoidance, of any talk about him. Yet, paradoxically, the phenomenon of death does not evoke a similar fear in the Indian psyche accepted, as it is, a natural event, a part of life: just like poverty, sickness and old age. Here is an insightful, at once compelling exposition of the phenomenon of death, based on pluri millennial tradition of the Hindus which, despite the affirmation of Western attitudes in certain elitist sections of the urban society, has endured since the times of the Vedas and Indic Civilization. Exploring, contextually, the age-old Indian view of mortal existence: from the very moment of an individual s conception to his/her journey to the Kingdom of Yama through the major phases of birth, growth and ageing, Professor Filippi unveils a complex network of sentiments, beliefs, scriptural references, customs, hopes, ritualistic practices and much else relevant to the great adventure of death. Notwithstanding the sentimental undertones of the mrityu-theme, Dr. Filippi s work outstands for its rare scientific objectivity. It has grown from years of his rigorous research effort involving not only his extensive studies of Indian literature: classical and modern, but also his interviews with Indian sannyasins, brahmanas, relatives of the dead, and the persons living around the cremation grounds. Together with visual material, bibliographic references, and a glossary of non-English terms, the book holds out as much appeal to the general reader as to the specialist.
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