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SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Premchand (Author)
- Binding :Paperback
- Language: Hindi
- Edition :2015
- Pages: 40 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10: 8190801783
- ISBN-13: 9788190801782
DESCRIPTION:
मुंशी प्रेमचन्द की गिनती हिन्दी के सर्वश्रेष्ठ कहानी-लेखकों में की जाती है। 1880 में उनका जन्म वाराणसी के एक छोटे से गांव लमही में एक साधारण परिवार में हुआ था। उनका घर का नाम धनपतराय था। स्कूल में अध्यापन का कार्य करते हुए उन्होंने कहानियां और उपन्यास लिखने शुरू किये। उन्होंने सैकड़ों कहानियां और एक दर्जन के लगभग उपन्यास लिखे जिनमें से गोदान, ग़बन, सेवासदन, रंगभूमि, कायाकल्प और निर्मला बहुत प्रसिद्ध हैं। 1936 में उनका देहान्त हुआ।
SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Premchand (Author)
- Binding :Hardcover
- Language: Hindi
- Edition :2015
- Pages: 208 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10: 8174831754
- ISBN-13: 9788174831750
DESCRIPTION:
प्रेमचंद निस्संदेह हिन्दी के सर्वश्रेष्ठ कहानीकार थे जिनकी गणना विश्वस्तरीय साहित्यकारों में होती है। अपने जीवनकाल में उन्होंने 250 से अधिक कहानियाँ लिखीं जो मुख्यतः उस समय के समाज के यथार्थ को दर्शाती हैं। इनमें बालविवाह, गरीबी, भुखमरी, ज़मींदारों के अत्याचार के खिलाफ एक जागरूकता बढ़ाने का भी प्रयास है। यथार्थ की इन सच्चाईयों से रू-ब-रू कराती कहानियों को पढ़ते हुए पाठक पूरी तरह से खो जाता है। ये कहानियाँ आज भी उतनी ही सामयिक हैं जितनी सौ साल पहले थीं। कहानियों के अतिरिक्त प्रेमचंद ने चैदह उपन्यास और अनगिनत निबंध लिखे। उन्होंने अन्य भाषाओं की कुछ पुस्तकों को भी हिन्दी में अनुदित किया।

SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Premchand (Author)
- Binding :Paperback
- Language: Hindi
- Edition :2018
- Pages: 208 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10: 8174831614
- ISBN-13: 9788174831613
DESCRIPTION:
प्रेमचंद निस्संदेह हिन्दी के सर्वश्रेष्ठ कहानीकार थे जिनकी गणना विश्वस्तरीय साहित्यकारों में होती है। अपने जीवनकाल में उन्होंने 250 से अधिक कहानियाँ लिखीं जो मुख्यतः उस समय के समाज के यथार्थ को दर्शाती हैं। इनमें बालविवाह, गरीबी, भुखमरी, ज़मींदारों के अत्याचार के खिलाफ एक जागरूकता बढ़ाने का भी प्रयास है। यथार्थ की इन सच्चाईयों से रू-ब-रू कराती कहानियों को पढ़ते हुए पाठक पूरी तरह से खो जाता है। ये कहानियाँ आज भी उतनी ही सामयिक हैं जितनी सौ साल पहले थीं। कहानियों के अतिरिक्त प्रेमचंद ने चैदह उपन्यास और अनगिनत निबंध लिखे। उन्होंने अन्य भाषाओं की कुछ पुस्तकों को भी हिन्दी में अनुदित किया।
SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Premchand (Author)
- Binding :Paperback
- Language: Hindi
- Edition :2015
- Pages: 32 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10: 9380717016
- ISBN-13: 9789380717012
DESCRIPTION:
मुंशी प्रेमचन्द की गिनती हिन्दी के सर्वश्रेष्ठ कहानी-लेखकों में की जाती है। 1880 में उनका जन्म वाराणसी के एक छोटे से गांव लमही में एक साधारण परिवार में हुआ था। उनका घर का नाम धनपतराय था। स्कूल में अध्यापन का कार्य करते हुए उन्होंने कहानियां और उपन्यास लिखने शुरू किये। उन्होंने सैकड़ों कहानियां और एक दर्जन के लगभग उपन्यास लिखे जिनमें से गोदान, ग़बन, सेवासदन, रंगभूमि, कायाकल्प और निर्मला बहुत प्रसिद्ध हैं। 1936 में उनका देहान्त हुआ।

SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Jaishankar Prasad (Author)
- Binding :Paperback
- Language: Hindi
- Edition :2015
- Pages: 176 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10: 9350643030
- ISBN-13: 9789350643037
DESCRIPTION:
जयशंकर प्रसाद बहुआयामी रचनाकार थे। कवि, नाटककार, कहानीकार होने के साथ-साथ वह उच्चकोटि के उपन्यासकार भी थे। जयशंकर प्रसाद और मुंशी प्रेमचंद समकालीन लेखक थे लेकिन दोनों के लेखन की अलग-अलग धाराएँ थीं। जहाँ प्रेमचंद की अधिकांश रचनाएँ उस समय के यथार्थवाद को उजागर करती हैं वहीं जयशंकर प्रसाद का लेखन आदर्शवादी है जिसमें भारतीय संस्कृति, इतिहास और प्राचीन गौरव-गाथाओं की झलक मिलती है। जयशंकर प्रसाद ने मात्र दो उपन्यास लिखे-कंकाल और तितली। तीसरा उपन्यास इरावती उनके निधन के कारण अधूरा रह गया। थ्ततली कृषि और ग्रामीण जीवन को केन्द्र में रखकर एक नारी की कहानी है। जो भारतीय दृष्टि और कृषि सभ्यता की पहचान करवाती है। इसमें वर्णित नारी की छवि है एक आदर्श प्रेमिका और आदर्श पत्नी की। वह कैसे अपने दांपत्य जीवन और प्रेम की पुकार के बीच अपना रास्ता चुनती है, इस द्वंद्व का दिल छू लेने वाला चित्रण इस उपन्यास में है।

SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Jaishankar Prasad (Author)
- Binding :Paperback
- Language: Hindi
- Edition :2018
- Pages: 176 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10: 9350643022
- ISBN-13: 9789350643020
DESCRIPTION:
जयशंकर प्रसाद बहुआयामी रचनाकार थे। जिनकी लेखन और रंगमंच दोनों पर अच्छी पकड़ थी। कवि, नाटककार, कहानीकार होने के साथ-साथ वह उच्चकोटि के उपन्यासकार भी थे। जयशंकर प्रसाद ने तीन उपन्यास लिखे, तितली, कंकाल और इरावती। अंतिम उपन्यास इरावती उनके निधन के कारण अधूरा रह गया। कंकाल में लेखक ने हिन्दू धर्म के ठेकेदारों की सच्चाई को उद्घाटित किया है। सत्य और मोक्ष की खोज में लगे धर्म के अनुयायी कैसे अपनी वासना में खुद फँस जाते हैं और औरों को इसका शिकार बनाते हैं। धार्मिक स्थानों के बंद दरवाज़ों के पीछे काम और वासना का यह खेल कैसे लोगों को, विशेषकर मासूम और निर्दोष लड़कियों की जि़ंदगी को तबाह कर देता है, इन सबका बहुत ही मार्मिक ताना-बाना बुना गया है इस उपन्यास में।
SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Jaishankar Prasad (Author)
- Binding :Paperback
- Edition :2018
- Pages: 152 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10: 9350642263
- ISBN-13: 9789350642269
DESCRIPTION:
जयशंकर प्रसाद (1889-1937) का महाकाव्य 'कामायनी' आधुनिक हिन्दी साहित्य की सबसे महत्त्वपूर्ण साहित्यिक कृति मानी जाती है। इसमें मानवीय संवेदनाओं, विचारों और कर्म का आदान-प्रदान दर्शाया गया है। यह महाकाव्य एक वैदिक कथानक पर आधारित है जिसमें मनु (एक मनुष्य) प्रलय के बाद अपने को बिलकुल भावनाहीन पाता है। फिर कैसे वह अलग-अलग भावनाओं, विचारों और कर्मों में उलझने लगता है। कई लोगों का मानना है कि 'कामायनी' के अध्यायों का क्रम इस बात का संकेत देता है कि उम्र के साथ मनुष्य के व्यक्तित्व में कैसे परिवर्तन आता है। यह महाकाव्य छायावादी कविता का सबसे अच्छा उदाहरण माना जाता है।
SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Jaishankar Prasad (Author)
- Binding :Hardcover
- Edition :2015
- Pages: 184 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10: 9350643278
- ISBN-13: 9789350643273
DESCRIPTION:
जयशंकर प्रसाद जहाँ उच्चकोटि के कवि थे, वहीं अच्छे कहानीकार भी थे। उनके पाँच कहानी-संग्रह प्रकाशित हुए जिन्होंने न सिर्फ हिन्दी कथा-साहित्य को समृद्ध किया बल्कि विशिष्ट विधा के प्रवर्तक कथाकार के रूप में उनकी पहचान बनाई। जयशंकर प्रसाद के लेखन में आदर्शवाद और प्राचीन गौरव गाथाओं की झलक मिलती है। उनकी कहानियों में भावना और आदर्श के बीच द्वंद्व का बहुत ही सशक्त चित्रण होता है जो उनकी कहानियों के पात्रों को यादगार बनाता है। ‘मदन मृणालिनी’ का मदन, ‘जहाँआरा’ का औरंगजेब, ‘पाप की पराजय’ का धनश्याम और ‘गुंडा’ का ननकूसिंह अविस्मरणीय पात्र बन गए हैं। इन कहानियों के अतिरिक्त उनकी सबसे प्रसिद्ध कहानी ‘छोटा जादूगर’ सहित बाईस कहानियाँ इस पुस्तक में सम्मिलित हैं।

SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Jaishankar Prasad (Author)
- Binding :Paperback
- Edition :2019
- Pages: 184 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10: 93506432610
- ISBN-13: 9789350643266
DESCRIPTION:
जयशंकर प्रसाद जहाँ उच्चकोटि के कवि थे, वहीं अच्छे कहानीकार भी थे। उनके पाँच कहानी-संग्रह प्रकाशित हुए जिन्होंने न सिर्फ हिन्दी कथा-साहित्य को समृद्ध किया बल्कि विशिष्ट विधा के प्रवर्तक कथाकार के रूप में उनकी पहचान बनाई। जयशंकर प्रसाद के लेखन में आदर्शवाद और प्राचीन गौरव गाथाओं की झलक मिलती है। उनकी कहानियों में भावना और आदर्श के बीच द्वंद्व का बहुत ही सशक्त चित्रण होता है जो उनकी कहानियों के पात्रों को यादगार बनाता है। ‘मदन मृणालिनी’ का मदन, ‘जहाँआरा’ का औरंगजेब, ‘पाप की पराजय’ का धनश्याम और ‘गुंडा’ का ननकूसिंह अविस्मरणीय पात्र बन गए हैं। इन कहानियों के अतिरिक्त उनकी सबसे प्रसिद्ध कहानी ‘छोटा जादूगर’ सहित बाईस कहानियाँ इस पुस्तक में सम्मिलित हैं।

SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Swayam Prakash (Author)
- Binding :Paperback
- Language: Hindi
- Edition :2014
- Pages: 132 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10: 9350642239
- ISBN-13: 9789350642238
DESCRIPTION:
स्वयं प्रकाश की कहानियां भारतीय जीवन के हर्ष-विषाद, उथल पुथल और मामूली समझी जाने वाली स्थितियों का सटीक वर्णन और विश्लेषण करती हैं। इसके लिए वे अपनी कथा-भाषा में व्यंग्य-चुहल और बतकही का इस्तेमाल करते हैं। बड़ी बात यह नहीं है कि एक कथाकार अपनी कहानियों में महान सत्य का उद्घाटन करे, अपितु बड़ी बात यह है कि जीवन सत्य उन घटनाओं और परिस्थितियों में स्वतः निकल पड़ता हो। मार्क्सवादी विचारधारा की रोशनी को लेखन के लिए ज़रूरी मानने वाले इस लेखक की रचनाएं बताती हैं कि वह अपने देश के मामूली लोगों और उनके जीवन-संघर्ष को कितना मान देते हैं, कितना प्यार करते हैं।

SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Swayam Prakash (Author)
- Binding :Hardcover
- Edition :2019
- Pages: 224 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10: 93865348610
- ISBN-13: 9789386534866
DESCRIPTION:
सुपरिचित कहानीकार स्वयं प्रकाश का यह कथेतर, धूप में नंगे पाँव पारम्परिक विधाओं के साँचों को तोड़ता है। कहीं तो यह यात्रा-वृत है, तो कहीं डायरी, कहीं संस्मरण और फिर पढ़ते हुए इसमें कहीं आत्मकथा की झलक भी मिलती है जिसमें पाठकों को विविधता का एक जीवंत संसार मिलता है। धूप में नंगे पाँव को कहानीकार की कार्यशाला की एक झाँकी भी कहा जा सकता है जहाँ स्वयं प्रकाश का वह संसार है जो अब तक उनके लेखन में नहीं आया। किताब शुरू होती है जब वह नौकरी करने घर से निकले और खत्म वहाँ होती है जब वे सेवानिवृत्त होकर घर लौटते हैं। इस अवधि की गहमागहमी और कशमकश का पूरा लेखा-जोखा है इसमें कि कैसे जीवन की जद्दोजहद ने स्वयं प्रकाश का लेखक रूप गढ़ने में अहम भूमिका निभाई। स्वयं प्रकाश की पहचान मूलतः कहानीकार की है लेकिन उपन्यास, निबन्ध और नाटक की अन्य विधाओं में भी उन्होंने लिखा है। हिन्दी साहित्य में योगदान के लिए उन्हें अनेक सम्मानों से अलंकृत किया जा चुका है जिसमें उल्लेखनीय हैं-राजस्थान साहित्य अकादमी पुरस्कार, वनमाली स्मृति पुरस्कार और सुभद्रा कुमारी चौहान पुरस्कार।
SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Om Prakash (Author)
- Binding :Paperback
- Edition :2015
- Pages: 192 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10: 8170281075
- ISBN-13: 9788170281078
DESCRIPTION:
व्यावहारिक हिन्दी शुद्ध प्रयोग
SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Om Prakash (Author)
- Binding :Hardcover
- Edition :2011
- Pages: 140 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10: 9350640317
- ISBN-13: 9789350640319
DESCRIPTION:
यह शब्दकोश विशेष रूप से पब्लिक स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए तैयार किया गया है। इसमें हाई स्कूल तक की पाठ्य-पुस्तकों में आने वाले प्रायः सभी शब्दों के सरल अर्थ दिये गये हैं। जहां केवल शब्द का अर्थ देने से आशय स्पष्ट नहीं होता, वहां चित्र भी दिये हैं। इस कोश की विशेषता यह भी है कि इसमें यथास्थान शब्दों के व्याकरणों का संकेत भी दिया है कि शब्द पुल्लिंग है अथवा स्त्रीलिंग। यदि शब्द क्रिया है तो क्रिया सकर्मक है अथवा अकर्मक। इसी प्रकार विशेषण, अव्यय, सर्वनाम आदि को भी शब्द के साथ ही लिखा है। वर्षों के अध्यापन के आधार पर इस 'विद्यार्थी हिंदी शब्दकोश' को विद्यार्थियों के लिए उपयोगी बनाने का पूरा प्रयत्न किया गया है। आशा है अघ्यापकगण और विद्यार्थी इसे उपयोगी पाएंगे। - संपादक

SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Vishnu Prabhakar (Author)
- Binding :Paperback
- Edition :2017
- Pages: 64 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10:8170283507
- ISBN-13: 9788170283508
DESCRIPTION:
विष्णु प्रभाकर जी की लिखी हुई ११ कहनायों का संग्रह।

SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Vishnu Prabhakar (Author)
- Binding :Hardcover
- Edition :2016
- Pages: 160 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10:8170289998
- ISBN-13: 9788170289999
DESCRIPTION:
‘पद्यमभूषण’ से सम्मानित लेखक विष्णु प्रभाकर का यह कहानी-संकलन हिन्दी साहित्य में मील का पत्थर साबित हुआ है। इसमें लेखक ने जिन चुनिंदा सोलह कहानियों को लिया है उन की दिलचस्प बात यह है कि अपनी हर कहानी से पहले उन्होंने उस घटना का भी उल्लेख किया है जिसने उन्हें कहानी लिखने की प्रेरणा दी।

SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Vishnu Prabhakar (Author)
- Binding :Hardcover
- Edition :2019
- Pages: 354 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10:8170280044
- ISBN-13: 9788170280040
DESCRIPTION:
मूल हिन्दी में प्रकाशन के समय से ‘आवारा मसीहा’ तथा उसके लेखक विष्णु प्रभाकर न केवल अनेक पुरस्कारों तथा सम्मानों से विभूषित किए जा चुके हैं, अनेक भाषाओं में इसका अनुवाद प्रकाशित हो चुका है और हो रहा है। ‘सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार’ तथा ‘पाब्लो नेरूदा सम्मान’ के अतिरिक्त बंग साहित्य सम्मेलन तथा कलकत्ता की शरत् समिति द्वारा प्रदत्त ‘शरत् मेडल’, उ.प्र. हिन्दी संस्थान, महाराष्ट्र तथा हरियाणा की साहित्य अकादमियों और अन्य संस्थाओं द्वारा उन्हें हार्दिक सम्मान प्राप्त हुए हैं। अंग्रेज़ी, बंगला, मलयालम, पंजाबी, सिन्धी और उर्दू में इसके अनुवाद प्रकाशित हो चुके हैं तथा तेलुगु, गुजराती आदि भाषाओं में प्रकाशित हो रहे हैं। शरतचन्द्र भारत के सर्वप्रिय उपन्यासकार थे जिनका साहित्य भाषा की सभी सीमाएँ लाँघकर सच्चे मायनों में अखिल भारतीय हो गया। उन्हें बंगाल में जितनी ख्याति और लोकप्रियता मिली, उतनी ही हिन्दी में तथा गुजराती, मलयालम तथा अन्य भाषाओं में भी मिली। उनकी रचनाएं तथा रचनाओं के पात्र देश-भर की जनता के मानो जीवन के अंग बन गए। इन रचनाओं और पात्रों की विशिष्टता के कारण लेखक के अपने जीवन में भी पाठक की अपार रुचि उत्पन्न हुई परन्तु अब तक कोई भी ऐसी सर्वांगसम्पूर्ण कृति नहीं आई थी जो इस विषय पर सही और अधिकृत प्रकाश डाल सके। इस पुस्तक में शरत् के जीवन से संबंधित अन्तरंग और दुर्लभ चित्रों के सोलह पृष्ठ भी हैं जिनसे इसकी उपयोगिता और बढ़ गई है। बंगला में भी यद्यपि शरत् के जीवन पर, उसके विभिन्न पक्षों पर बीसियों छोटी-बड़ी कृतियां प्रकाशित हुईं, परन्तु ऐसी समग्र रचना कोई भी प्रकाशित नहीं हुई थी। यह गौरव पहली बार हिन्दी में लिखी इस कृति को प्राप्त हुआ है।

SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Vishnu Prabhakar (Author)
- Binding :Hardcover
- Edition :2015
- Pages: 204 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10:8170284775
- ISBN-13: 9788170284772
DESCRIPTION:
यशस्वी साहित्यकार विष्णु प्रभाकर की बहुप्रतीक्षित आत्मकथा...साथ ही पूरी एक सदी के साहित्यिक जीवन तथा समाज और देश का चारों ओर दृष्टि डालता आईना और दस्तावेज़। विष्णु प्रभाकर अपने सुदीर्घ जीवन में साहित्य के अतिरिक्त सामाजिक नवोदय तथा स्वतंत्रता-संग्राम से भी पूरी अंतरंगता से जुड़े रहे-रंगमंच, रेडियो तथा दूरदर्शन सभी में वे आरंभ से ही सक्रिय रहे। शरत्चन्द्र चटर्जी के जीवन पर लिखी उनकी बहुप्रशंसित कृति ‘आवारा मसीहा’ की तरह यह भी अपने ढंग की विशिष्ट रचना है। यह आत्मकथा तीन खंडों में प्रकाशित है : पंखहीन (प्रथम खंड), मुक्त गगन में (द्वितीय खंड), और पंछी उड़ गया (तृतीय खंड)

SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Devi Shankar Prabhakar (Author)
- Binding :Paperback
- Edition :2011
- Pages: 48 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10:8170283647
- ISBN-13: 9788170283645
DESCRIPTION:
अलग अलग प्रांतों की लोक-कथाओं की पुस्तक मलिका से हरियाणा की लोककथाएँ। ये कहानियाँ भारत के हरियाणा प्रांत की जीवन शैली से जुडी हुई हैl

SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Philipken (Author)
- Binding :Hardcover
- Language : Hindi
- Edition :2018
- Pages: 280 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10: 8170284627
- ISBN-13: 9788170284628
DESCRIPTION:
हिन्दू धर्म में त्रिमूर्ति के तीन देवताओं में से एक विष्णु हैं जिन्हें जग का पालनकर्ता भी कहा जाता है। पौराणिक ग्रंथों में विष्णु को दस अवतारों वाला दशावतार माना गया है और श्रीराम और श्रीकृष्ण उनके सबसे प्रमुख अवतार हैं। विष्णु का निवास दो अलग-अलग जगहों पर है: दुनिया से दूर बैकुंठ में, और दूसरा क्षीर-सागर में जहाँ पर वह अनन्त शेष पर विराजमान हैं। भगवद्गीता में विष्णु को विश्वरूप या विराटपुरुष भी माना गया है; इस जग पर अपना पूरा ध्यान केन्द्रित किए सदा प्रसन्न दिखने वाले विष्णु की चार बाँहें हैं जिनमें उन्होंने कमल का फूल, गदा, शंख और सुदर्शन-चक्र पकड़ रखा है। चार हाथों में पकड़ी अलग-अलग वस्तुओं का क्या रहस्य है? उनके पाँच अस्त्र भी हैं, उनका क्या महत्त्व है? विष्णु को मोक्ष या मुक्ति दिलाने वाला मुकुन्द क्यों कहा जाता है? जानिए इन सब रहस्यों को-इस रोचक पुस्तक में। देवदत्त पटनायक पौराणिक विषयों के जाने-माने विशेषज्ञ हैं। पौराणिक कहानियों, संस्कारों और रीति-रिवाज़ों का हमारी आधुनिक ज़िन्दगी में क्या महत्त्व है, इस विषय पर वह लिखते भी हैं और जगह-जगह व्याख्यान भी देते हैं। इनकी तीस से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं और टीवी पर इनका कार्यक्रम भी दिखाया जाता है। शिव के सात रहस्य, शिखण्डी और कुछ अनसुनी कहानियाँ, देवी के सात रहस्य, पशु, भारतीय पौराणिक कथाएँ, भारत में देवी, शिव से शंकर तक और सीता के पाँच निर्णय उनकी अन्य बहुचर्चित पुस्तकें हैं।

SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Devdutt Pattanaik (Author)
- Binding :Paperback
- Language : Hindi
- Edition :2015
- Pages: 224 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10: 9350642409
- ISBN-13: 9789350642405
DESCRIPTION:
हिन्दू धर्म में त्रिमूर्ति के तीन देवताओं में से एक विष्णु हैं जिन्हें जग का पालनकर्ता भी कहा जाता है। पौराणिक ग्रंथों में विष्णु को दस अवतारों वाला दशावतार माना गया है और श्रीराम और श्रीकृष्ण उनके सबसे प्रमुख अवतार हैं। विष्णु का निवास दो अलग-अलग जगहों पर है: दुनिया से दूर बैकुंठ में, और दूसरा क्षीर-सागर में जहाँ पर वह अनन्त शेष पर विराजमान हैं। भगवद्गीता में विष्णु को विश्वरूप या विराटपुरुष भी माना गया है; इस जग पर अपना पूरा ध्यान केन्द्रित किए सदा प्रसन्न दिखने वाले विष्णु की चार बाँहें हैं जिनमें उन्होंने कमल का फूल, गदा, शंख और सुदर्शन-चक्र पकड़ रखा है। चार हाथों में पकड़ी अलग-अलग वस्तुओं का क्या रहस्य है? उनके पाँच अस्त्र भी हैं, उनका क्या महत्त्व है? विष्णु को मोक्ष या मुक्ति दिलाने वाला मुकुन्द क्यों कहा जाता है? जानिए इन सब रहस्यों को-इस रोचक पुस्तक में। देवदत्त पटनायक पौराणिक विषयों के जाने-माने विशेषज्ञ हैं। पौराणिक कहानियों, संस्कारों और रीति-रिवाज़ों का हमारी आधुनिक ज़िन्दगी में क्या महत्त्व है, इस विषय पर वह लिखते भी हैं और जगह-जगह व्याख्यान भी देते हैं। इनकी तीस से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं और टीवी पर इनका कार्यक्रम भी दिखाया जाता है। शिव के सात रहस्य, शिखण्डी और कुछ अनसुनी कहानियाँ, देवी के सात रहस्य, पशु, भारतीय पौराणिक कथाएँ, भारत में देवी, शिव से शंकर तक और सीता के पाँच निर्णय उनकी अन्य बहुचर्चित पुस्तकें हैं।

SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Devdutt Pattanaik (Author)
- Binding :Paperback
- Language : Hindi
- Edition :2017
- Pages: 128 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10: 93506438810
- ISBN-13: 9789350643884
DESCRIPTION:
रामायण मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की गाथा मानी जाती है और उन्हीं को महिमामंडित करती है। भारत से लेकर दक्षिण-पूर्व के दूर-दराज के देशों में रामायण अनेक भाषाओं में उपलब्ध है और हरेक में कुछ अन्तर है, लेकिन सभी मुख्यता श्रीराम को केन्द्र में रखकर लिखी गई हैं। शायद यह पहली बार है कि रामायण की कथा सीता के दृष्टिकोण से बतायी गयी है। देवदत्त पट्टनायक की यह पुस्तक रामायण पर आधारित अनूठी कृति है जिसे पढ़कर अहसास होता है कि रामायण में सबसे महत्त्वपूर्ण भूमिका शायद सीता की थी और पाठक के मन में सीता की एक नयी छवि उजागर होती है - अपनी स्वतन्त्र सोच और स्वयं निर्णय करने की हिम्मत रखने वाली सीता की, जबकि जनसाधारण में यह विश्वास है कि सीता वही करती थीं जो श्रीराम कहते थे।

SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Devdutt Pattanaik (Author)
- Binding :Paperback
- Language : Hindi
- Edition :2016
- Pages: 160 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10: 9350642638
- ISBN-13: 9789350642634
DESCRIPTION:
प्रखर तपस्वी शिव, हिन्दू धर्म के सर्वाधिक पूजे जाने वाले देवता हैं। शरीर पर शेर की खाल ओढ़े, सिर पर जटाएँ बाँधे, गर्दन में एक साँप लपेटे दूर-दराज़ के ठंडे और वीरान कैलाश पर्वत पर रहने वाले शिव के कई रूप हैं। कहीं तो वह कैलाश पर्वत पर धूनी रमाये योगी का रूप लेते हैं और कहीं अपनी पत्नी पार्वती के साथ गृहस्थ का रूप धारण करते हैं। हिन्दुओं के लिए शिव अति पूजनीय हैं और उनकी आराधना का सबसे लोकप्रिय प्रतीक रूप है शिवलिंग। क्या यह शिवलिंग मात्र एक यौन का प्रतीक है - कई विद्वानों का तो ऐसा ही मानना है, किन्तु कई इससे सहमत नहीं हैं। शिव के लिंग रूप के यथार्थ का केन्द्र है यह पुस्तक। इस लिंग रूप प्रतीक के आध्यात्मिक संकेतों और अर्थों को समझने के लिए शिव-भक्ति के साथ जुड़े सभी कर्मकांड, प्रतीक और कथाओं के गहन शोध के बाद आम पाठक के लिए प्रस्तुत है यह अति रोचक और ज्ञानवर्धक पुस्तक

SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Devdutt Pattanaik (Author)
- Binding :Paperback
- Language : Hindi
- Edition :2015
- Pages: 232 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10: 9350642395
- ISBN-13: 9789350642399
DESCRIPTION:
हिन्दुओं के अनगिनत देवी-देवताओं में से शिव सबसे अधिक लोकप्रिय हैं। महादेव के नाम से भी जाने जानेवाले शिव, विष्णु और ब्रह्मा के साथ हिन्दू देवताओं के त्रिमूर्ति माने जाते हैं। शिव के अनेक रूप हैं: कहीं तो वह कैलाश पर्वत की बर्फ़ीली चोटी पर बैठे अपने पर नियंत्रण रखनेवाले एक ब्रह्मचारी योगी हैं जो दुनिया का विनाश करने की क्षमता रखते हैं तो दूसरी ओर अपनी पत्नी और पुत्रों के साथ गृहस्थ आश्रम का आनन्द भोगते हुए गृहस्थ हैं। इनमें से कौन-सा है शिव का वास्तविक रूप? माथे पर तीसरी आँख, गर्दन में सर्प, शीश पर अर्द्धचन्द्र, केशों से बहती गंगा और हाथों में त्रिशूल और डमरू-इन सब प्रतीकों का क्या अर्थ है? शिव के अनेक रूप और प्रतीकों के पीछे छिपे हैं हमारे पौराणिक अतीत के अनेक रहस्य जिनमें से सात को समझने का प्रयास इस पुस्तक में किया गया है। देवदत्त पट्टनायक पौराणिक विषयों के जाने माने विशेषज्ञ हैं। पौराणिक कहानियों, संस्कारों और रीति-रिवाजों का हमारी आधुनिक ज़िन्दगी में क्या महत्त्व है इस विषय पर वह लिखते भी हैं और जगह-जगह व्याख्यान भी देते हैं। इनकी पन्द्रह से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं और टीवी पर इनका कार्यक्रम भी दिखाया जाता है।

SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Devdutt Pattanaik (Author)
- Binding :Paperback
- Language : Hindi
- Edition :2015
- Pages: 190 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10: 9350642891
- ISBN-13: 9789350642894
DESCRIPTION:
असामान्य यौनप्रवृत्ति कोई आधुनिक या पश्चिमी बात नहीं है। दो हज़ार वर्षों से भी पुरानी हिन्दुत्व की विशाल मौखिक और लिखित परम्पराओं में असामान्य यौनप्रवृत्ति की कई कथाएँ और उदाहरण पाए जाते हैं, जैसे महाभारत में शिखण्डी जो अपनी पत्नी को सन्तुष्ट करने के लिए पुरुष बना; या फिर महादेव जो इसलिए स्त्री बने ताकि अपने भक्त के बच्चे को जन्म दे सकें; या चूडाला जो अपने पति को ज्ञान देने के लिए पुरुष बनी-ये और ऐसी अनेक कथाएँ इस पुस्तक में प्रस्तुत हैं। दिलचस्प और हृदयस्पर्शी, यहाँ तक कि उद्विग्नता पैदा करने वाली, ये कथाएँ इस बात की साक्षी हैं कि हमारे देश में असामान्य यौनप्रवृत्ति की कितनी पुरानी परम्परा है। देवदत्त पट्टनायक पौराणिक विषयों के जाने माने विशेषज्ञ हैं। पौराणिक कहानियों, संस्कारों और रीति-रिवाज़ों का हमारी आधुनिक जि़न्दगी में क्या महत्त्व है, इस विषय पर वह लिखते हैं और जगह-जगह व्याख्यान भी देते हैं। इनकी पन्द्रह से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं और टीवी पर इनका कार्यक्रम भी दिखाया जाता है। विष्णु के सात रहस्य, शिव के सात रहस्य और देवी के सात रहस्य उनकी बहुचर्चित पुस्तकें हैं।
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