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It is said that you unfold a whole new world every time you open a book. Ganges India presents to you the widest and the most distinctive genre of books to satisfy the diverse taste and preferences of all readers. Here you will find books of assorted topics and interest that can not only strengthen your love for books, but also change your life for good. So, readers! Assemble and dive into the greatest collection of knowledge and enrich your awareness and perception. Books have been an indispensable part of mankind and serve as a basis of our lifestyle. The foundations of all aspects of our lives from ideologies, beliefs, education, ethics, culture were laid by the knowledge our ancestors gathered from the prehistoric writings; and it passed on to the subsequent generations through writing itself. So in a way, the content of books can be intense enough to provide a meaningful direction to your life; precisely why we acknowledge the importance of a worthwhile theme and substance in a book. Hence, we bring to you a curated collection of books you would definitely consider keeping close to your heart. We understand your interest in the literary sphere and we have the perfect pick for all categories of book enthusiasts. Enlighten your mind with the various subjects available in Ganges India which includes Hinduism, Buddhism, Astrology, Art & Architecture, History, Philosophy, Performing Arts, Literature, Fiction, Alternative Health, Cooking, Travel, Biographies, General Books, Saints, Indian Languages and of course the junior readers can find their match in the Children’s section. Each category comes with a variety of options for you to choose from based on your personal inclination. One will undisputedly enhance their knowledge, wisdom and experience through these books without having to physically travel around the world or personally undergo any exasperating situations. Additionally, the different genres of books varying from educational, motivational, lifestyle, fiction will not only broaden your understanding towards the way the world works, but also will help you make better decisions for yourself as you would be exposed to a plethora of perspectives. Our Books section is empowered by the loyalty of readers towards books. Each book is provided with all the necessary details to ensure a pleasant buying experience for you. Also, we recommend that you go through the elaborate elucidation provided for most of the products, about the theme and author of the books for better comprehension of the content. Explore this exclusive section of readers’ paradise to immerse yourself in the cognizance of a wide range of subjects. We are certain that there are a gazillion of book-lovers out there; so before these books run out of stock, it is high time that you add them to your precious book collection in order to reinvent your passion and enhance your individual evolution. We are positive that you will be thrilled to read through the promising content of every product in this category

SPECIFICATION:
- Publisher :Rajpal and Sons
- By: Ramesh Chandra Shah (Author)
- Binding : Paperback
- Language: Hindi
- Edition :2012
- Pages: 128 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10 : 93506401810
- ISBN-13: 9789350640180
DESCRIPTION:
एक लेखक के रूप में रमेशचंद्र शाह की पहचान भले ही आलोचक और निबंधकार की है, किन्तु किसी कथा-आंदोलन से जुड़े बिना भी उन्होंने हिन्दी कहानी की विकास यात्रा में सार्थक और उल्लेखनीय हस्तक्षेप किया है। उनके पांच प्रकाशित कहानी-संग्रह इसकी पुष्टि करते हैं। पारम्परिक किस्सागोई से शुरू कर, चरित्र प्रधान, एकालाप आदि अनेक रंगतों से समृद्ध अपनी पचास से ऊपर कहानियों में से चुन कर 11 कहानियों का यह कसा और गठा हुआ संकलन शाह जी ने ‘मेरी प्रिय कहानियाँ’ पुस्तकमाला के लिए विशेष रूप से तैयार किया है। अपनी लेखन-प्रक्रिया और कहानी संबंधी अपनी मान्यताओं को रेखांकित करते हुए, संकलन से शुरू में, लेखक ने विस्तृत भूमिका भी दी है।

SPECIFICATION:
- Publisher :Rajpal and Sons
- By: Ramesh Chandra Shah (Author)
- Binding : Hardcover
- Language: Hindi
- Edition :2012
- Pages: 128 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10:9350640171
- ISBN-13: 9789350640173
DESCRIPTION:
एक लेखक के रूप में रमेशचंद्र शाह की पहचान भले ही आलोचक और निबंधकार की है, किन्तु किसी कथा-आंदोलन से जुड़े बिना भी उन्होंने हिन्दी कहानी की विकास यात्रा में सार्थक और उल्लेखनीय हस्तक्षेप किया है। उनके पांच प्रकाशित कहानी-संग्रह इसकी पुष्टि करते हैं। पारम्परिक किस्सागोई से शुरू कर, चरित्र प्रधान, एकालाप आदि अनेक रंगतों से समृद्ध अपनी पचास से ऊपर कहानियों में से चुन कर 11 कहानियों का यह कसा और गठा हुआ संकलन शाह जी ने ‘मेरी प्रिय कहानियाँ’ पुस्तकमाला के लिए विशेष रूप से तैयार किया है। अपनी लेखन-प्रक्रिया और कहानी संबंधी अपनी मान्यताओं को रेखांकित करते हुए, संकलन से शुरू में, लेखक ने विस्तृत भूमिका भी दी है।

SPECIFICATION:
- Publisher :Rajpal and Sons
- By: Nawab Wajid Ali Shah (Author)
- Binding : Paperback
- Language: Hindi
- Edition :2017
- Pages: 176 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10:9350643901
- ISBN-13: 9789350643907
DESCRIPTION:
परीख़ाना जहाँ एक तरफ़ नवाब वाजिद अली शाह की रंगीन जि़न्दगी की खुली दास्तान है वहीं दूसरी तरफ़ यह उन्नीसवीं सदी की लखनवी संस्कृति का कीमती दस्तावेज़ है। नवाब वाजिद अली शाह (30 जुलाई 1822-21 सितम्बर 1887) अवध के दसवें और आखिरी नवाब थे जिन्होंने नौ वर्षों तक अवध पर शासन किया। साहित्य और संस्कृति से बेहद लगाव रखने वाले वे एक कुशल शासक और संवेदनशील राजा थे जिन्हें प्रेम-मोहब्बत में सराबोर रहना पसन्द था। वह कत्थक के कुशल नर्तक और शास्त्रीय संगीत के सच्चे साधक थे जिन्होंने कई नये राग भी ईजाद किये। शास्त्रीय गायन की विधा, ‘ठुमरी’ को लोकप्रिय करने में उनका महत्त्वपूर्ण योगदान था। लिखने-पढ़ने का भी नवाब वाजिद अली शाह को बहुत शौक था और उन्होंने 60 से अधिक पुस्तकों की रचना की। नवाब वाजिद अली शाह के शासनकाल में लखनऊ उत्तर भारत का सांस्कृतिक केन्द्र बन गया था जहाँ पर हर कलाकार को अपनी कला दर्शाने का अवसर प्राप्त होता था। लखनऊ में उन्होंने ‘परीख़ाना’ नाम का एक रंगारंग महल कायम किया जहाँ सैकड़ों लड़कियों को राजसी खर्च पर नृत्य और संगीत की शिक्षा दी जाती थी। यहाँ से निकली लड़कियों को ‘परी’ कहा जाता था जैसे सुलतान परी, माहरुख परी। इनमें से बहुतों के साथ नवाब वाजिद अली शाह ने ब्याह भी रचाया और उन्हीं सब परियों के रिश्तों का बेबाक बयान है इस किताब में। ‘परीख़ाना’ नाम की इमारत आज भी लखनऊ में स्थित है और इसमें संगीत विद्यालय चलाया जा रहा है।

SPECIFICATION:
- Publisher :Rajpal and Sons
- By: Anna Sewell (Author)
- Binding : Paperback
- Language: Hindi
- Edition :2016
- Pages: 80 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10::81748300910
- ISBN-13: 9788174830098
DESCRIPTION:
एना सेवेल के प्रसिध्द उपन्यास 'ब्लैक ब्युटी' का सरल हिंदी रूपांतर।
SPECIFICATION:
- Publisher :Rajpal and Sons
- By: Amartya Sen (Author)
- Binding :Hardcover
- Language: Hindi
- Edition :2017
- Pages: 384 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10::8170288665
- ISBN-13: 9788170288664
DESCRIPTION:
विश्व प्रसिद्ध अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने अर्थशास्त्र को परंपरागत संकुचित दायरे के बाहर विकासशील देशों की समस्याओं, जैसे गरीबी की आर्थिक और सामाजिक समस्याओं के साथ जोड़ा है। उनकी प्रत्येक नई पुस्तक इसलिए चर्चा का केन्द्र बन जाती है क्योंकि वे अर्थशास्त्री की दृष्टि से सामाजिक समस्याओं पर नये ढंग से विचार करते हैं और नई संभावनाएं बनाते हैं। नोबेल पुरस्कार से सम्मानित अमर्त्य सेन को अपनी इस नई देन के लिए विश्व-भर में सम्मानित किया जा रहा है। इससे पहले भी उन्होंने अपनी पुस्तकों में सामाजिक न्याय पर विशद् चर्चा की है और इसके विभिन्न पक्षों पर विचार किया है। न्याय एक ऐसा आदर्श है जो आज भी जनसाधारण की पहुँच के बाहर है। यह भी विचारणीय है कि वर्तमान न्याय व्यवस्था में जीवन-मूल्यों की रक्षा और वृद्धि कहाँ तक हो पाती है। इस महत्त्वपूर्ण पुस्तक में विद्वान् लेखक ने न्याय की विभिन्न परिभाषाओं-परिकल्पनाओं पर गंभीरता से विचार किया है और उनके मत में न्याय को अभी तक ठीक दिशा नहीं मिल पाई है। संसार के प्रसिद्ध विचारकों रूसो, कांट, लाक, हाब्स ने अपने-अपने समय में इस विषय पर विचार किया है और वे तत्कालीन नीतिकारों के विचारों से प्रभावित रहे हैं। इस पुस्तक में न्याय, विशेषकर सामाजिक न्याय के स्वरूप को परिभाषित करने का, विभिन्न दृष्टिकोणों से उसे परखने का प्रयत्न किया गया है। एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण पुस्तक जो नई सोच के साथ न्याय की व्यवस्था के सभी पक्षों पर मौलिक विचार प्रस्तुत करती है। समीक्षकों की दृष्टि में यह पुस्तक इस संसार में अन्याय के विरुद्ध सार्थक आवाज़ उठाती है और न्याय की नई व्यवस्था की रूपरेखा प्रस्तुत करती है।

SPECIFICATION:
- Publisher : Ramakrishna Math
- By : Swami Budhananda
- Cover : Paperback
- Language : English
- Edition : 2005
- Pages : 130
- Weight : 150 gm
- ISBN-10 : 8178233657
- ISBN-13 : 978-8178233659
DESCRIPTION:
Anger is an obstacle to spiritual growth. One may try to rationalize it, and talk about righteous anger, but in the end, anger is physically and spiritually destructive.The author talks about the root of anger and how to deal with it. Of special note is the chapter, "From Passion to Compassion."

SPECIFICATION:
- Publisher :Rajpal and Sons
- By: Amartya Sen (Author)
- Binding :Hardcover
- Language: Hindi
- Edition :2018
- Pages: 196 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10::8170286743
- ISBN-13: 9788170286745
DESCRIPTION:
नोबेल-पुरस्कार-विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन संस्कृति और समाज-विज्ञान के भी मौलिक चिन्तक हैं। अपनी पूर्व प्रकाशित पुस्तक ‘भारतीय अर्थतंत्र, इतिहास और संस्कृति’ में उन्होंने संस्कृति और मानव धर्म से जुड़े प्रश्नों पर विस्तारपूर्वक विचार किया था। अब अपनी इस नई पुस्तक में वे एक सर्वथा नए विषय और मौलिक चिन्तन दृष्टि के साथ हमारे सम्मुख हैं। अस्तित्व अथवा पहचान का प्रश्न और जंगल की आग की तरह फैल रही हिंसा की गहरी अर्थपूर्ण परख और समीक्षा इस पुस्तक का विषय है। विद्वान लेखक के गहरे अनुशीलन और चिंतन का परिणाम है यह अत्यंत महत्त्वपूर्ण सामयिक पुस्तक।

SPECIFICATION:
- Publisher :Rajpal and Sons
- By: Amartya Sen (Author)
- Binding :Hardcover
- Language: Hindi
- Edition :2018
- Pages: 204 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10::8170283035
- ISBN-13: 9788170283034
DESCRIPTION:
नोबेल पुरस्कार से सम्मानित अर्थशास्त्री प्रो. अमर्त्य सेन को विशिष्ट महत्व प्रदान किए जाने का मुख्य कारण यह है कि उन्होंने अर्थशास्त्र को मनुष्य के कल्याण का साधन बनाने के उद्देश्य से जोड़ा और इसके विविध पैमाने भी तैयार किए। इससे पूर्व अर्थशास्त्र को मात्र धन-संपदा का अध्ययन माना जाता था, उन्होंने उसे पहली बार दर्शन और नैतिकता की दिशा में उन्मुख किया। इसके लिए उन्होंने स्वयं तो दर्शन शास्त्र का गहरा अध्ययन किया ही, उसे अर्थशास्त्र के साथ पढ़ाना भी-विशेष रूप से अमेरिका के हारवर्ड विश्वविद्यालय में-आरंभ किया। मूल सिद्धान्तों के गणितीय निर्माण और विकास के साथ-साथ उन्होंने इसके व्यावहारिक पक्ष-राष्ट्रीय आय, नौकरियाँ, विषमता और ग़रीबी आदि-की गणना और मापन को भी बहुत दूर तक विकसित किया है। प्रस्तुत रचना ग़रीबी और उसी के संदर्भ में अकालों का उनका नवीन विश्लेषण प्रस्तुत करती है। इसने अकाल की अभी तक प्रचलित सभी धारणाओं को उलट-पुलट कर सरकारों को हँसी का पात्र बना दिया। विकासशील देशों के लिए प्रो. अमर्त्य सेन के विचार और उन पर आधारित योजनाएं विशेष महत्त्वपूर्ण हैं। यह रचना दुनिया भर में बहुत प्रसिद्ध हुई है। ‘‘लेखक का दिमाग़ सर्चलाइट की तरह काम करता है और पुरानी स्थापित धारणाओं का खंडन करता चलता है...’’-लंदन रिव्यू आव बुक्स। ‘‘...समाजशास्त्र की सर्वोत्तम परंपरा को आर्थिक दृष्टिकोण से व्यक्त करने वाली पुस्तक। अनुभव और तर्क पर आधारित।’’-दि इकानामिस्ट, लंदन।

SPECIFICATION:
- Publisher :Rajpal and Sons
- By: Amartya Sen (Author)
- Binding :Hardcover
- Language: Hindi
- Edition :2014
- Pages: 308 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10::8170283620
- ISBN-13: 9788170283621
DESCRIPTION:
भारत अत्यन्त विशाल देश है और इसके प्रदेश आर्थिक विकास तथा उसके कारकों की दृष्टि से एक दूसरे से बहुत भिन्न हैं। प्रत्येक प्रदेश की विकास योजनाओं को उसकी पृष्ठभूमि और परिप्रेक्ष्य में ही परखा जाना चाहिए। यह पुस्तक उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और केरल के आर्थिक अध्ययन इस दृष्टि से प्रस्तुत करती है कि अन्य प्रदेश उनके आईने में विकास की अपनी समस्याओं को न केवल रेखांकित कर सकें बल्कि उनके हल भी ढूँढ़ सकें। ‘‘अमर्त्य सेन की महत्त्वपूर्ण कृतियाँ जाने-माने प्रकाशक राजपाल एण्ड सन्ज़ के उद्यम से हिन्दी भाषा में आ रही हैं। इस प्रयास का महत्त्व यह है कि जिस बहुसंख्यक गरीब और गैर-अमीर मध्यमवर्गीय जनता के जीवन-परिवर्तन को इन विरले अर्थशास्त्रियों के विचार-सरोकार समर्पित हैं-अब उसकी एक बड़ी संख्या को ये उपलब्ध हैं। वे उन पर खुलकर और सोच-समझकर बहस कर सकते हैं और जब भी कोई सरकार जन-हितकारी आर्थिक नीतियों की घोषणा और जन-जीवन में बदलाव के दावे करती है तो वे उन्हें आंक, तोल कर परख सकते हैं। जो ठीक है उससे सहमति और जो गलत है, उस पर विरोध के स्वर उठा सकते हैं। नयी शताब्दी और सहस्राब्दी के भारतीयों के लिए अर्थ जगत और अर्थनीतियों के प्रति जागरूक होना और एक सक्रिय आर्थिक मानव की भूमिका निभाना कत्र्तव्य भी है और आवश्यकता भी।’’-दैनिक हिन्दुस्तान। ‘‘शोधकर्ताओं, विकास कार्यकर्ताओं तथा स्वैच्छिक संस्थाओं के लिए अत्यन्त उपयोगी...सरल भाषा के कारण सामान्य पाठक के लिए भी बोधगम्य’’-बिज़नैस स्टैन्डर्ड
SPECIFICATION:
- Publisher : Advaita Ashrama
- By : Monks of the Ramakrishna Order
- Cover : Paperback
- Language : English
- Edition : 2009
- Pages : 214
- Weight : 210 gm
- Size : 5.5 x 0.5 x 8.5 inches
- ISBN-10 : 817120046X
- ISBN-13 : 978-8171200467
DESCRIPTION:
A fine introductory book on the practice of meditation. Collected from the works of senior swamis with many years of experience in the West. --- From the Table of Contents:Living the Mature Way ...Before You Sit In Meditation ...The Yoga of Consciousness ...Lessons in Meditation ...The Science of Mantra ...The Repetition of the Name of God ...The Trained Mind ... The Way of Meditation
SPECIFICATION:
- Publisher :Rajpal and Sons
- By: Amartya Sen (Author)
- Binding :Hardcover
- Language: Hindi
- Edition :2016
- Pages: 328 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10::8170286387
- ISBN-13: 9788170286387
DESCRIPTION:
... अमर्त्य सेन द्वारा व्यक्त तथा समर्थित विचार अत्यन्त सार्थक हैं।-इकानामिस्ट। बिलकुल नये विचार...ताज़गी से भरपूर, विद्वत्तापूर्ण तथा मानवीय...सेन के आशावाद तथा योजनाओं से मनुष्य सोचने लगता है कि समस्याओं का सचमुच कोई हल है।-बिज़नेस वीक। शोधकर्ताओं, विकास कार्यकर्ताओं तथा स्वैच्छिक संस्थाओं के लिए अत्यन्त उपयोगी...सरल भाषा के कारण सामान्य पाठक के लिए भी बोधगम्य-बिज़नेस स्टैण्डर्ड। ...आर्थिक सुधार के प्रमुख मुद्दों पर एक नया दृष्टिकोण-द हिन्दू। लेखक का दिमाग सर्चलाइट की तरह काम करता है और पुरानी स्थापित धारणाओं का खंडन करता चलता है।-लंदन रिव्यू आफ़ बुक्स। अमर्त्य सेन के विचार क्रांतिकारी सम्भावनाओं से पूर्ण हैं।-फ़ारेन अफ़ेयर्स

SPECIFICATION:
- Publisher :Rajpal and Sons
- By: Amartya Sen (Author)
- Binding :Hardcover
- Language: Hindi
- Edition :2014
- Pages: 212 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10::81702834010
- ISBN-13: 9788170283409
DESCRIPTION:
आजादी के पचास वर्ष बाद भी भारत विकसित देशों की श्रेणी में नहीं आ सका है। उसी के समान प्राचीन और विशाल भूमि तथा जनसंख्या वाला देश चीन उसकी तुलना में कहीं आगे बढ़ता चला जा रहा है। पूर्वी एशिया के अन्य अनेक देश भी बहुत प्रगति कर चुके हैं। क्यों? प्रो. सेन का मानना है कि भारत की तुलना में उन देशों में पहले से हुआ साक्षरता प्रसार, देश भर में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार तथा स्त्री-शक्ति का सभी कार्यों में आगे बढ़-चढ़कर योगदान ही इसका प्रमुख कारण है। प्रस्तुत पुस्तक सामाजिक अवसरों को प्राथमिकता देने वाले इन प्रमुख कारकों का तुलनात्मक आंकड़े देकर विवेचन करती है। ‘‘...आर्थिक सुधार के प्रमुख मुद्दों पर एक नया दृष्टिकोण’’-हिन्दू। ‘‘...यह पुस्तक इस विषय पर विचार प्रस्तुत करती है कि जनता की क्षमताएं बढ़ाना क्यों आवश्यक है।’’-फिनेन्शियल एक्सप्रेस। ‘‘भारत की उपलब्धियों तथा असफलताओं का प्रभावशाली विवरण...भारत के सामाजिक-आर्थिक विकास पर बहस के लिए बिलकुल नये मुद्दे प्रस्तुत करती है यह महत्त्वपूर्ण पुस्तक।’’-टाइम्स हायर एजुकेशन सप्लीमेंट। ‘‘राज्य तथा बाजार के पारस्परिक संबंध के विषय में यह पुस्तक बहुत महत्त्वपूर्ण विचार प्रस्तुत करती है।’’-इकानामिक टाइम्स। ‘‘उपेक्षितों के लिए सहानुभूति तथा निष्पक्ष विश्लेषण...इस पुस्तक की विशेषता है। इस देश की अर्थनीति में रुचि रखने वाले सभी व्यक्तियों के पढ़ने योग्य।’’-आउटलुक।

SPECIFICATION:
- Publisher :Rajpal and Sons
- By: Amartya Sen (Author)
- Binding :Hardcover
- Language: Hindi
- Edition :2017
- Pages: 120 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10::8170283019
- ISBN-13: 9788170283010
DESCRIPTION:
नोबेल पुरस्कार से सम्मानित अर्थशास्त्री प्रो. अमर्त्य सेन को विशिष्ट महत्त्व प्रदान किए जाने का मुख्य कारण यह है कि उन्होंने अर्थशास्त्र को मनुष्य के कल्याण का साधन बनाने के उद्देश्य से जोड़ा और इसके विविध पैमाने भी तैयार किए। इससे पूर्व अर्थशास्त्र को मात्र धन-संपदा का अध्ययन माना जाता था, उन्होंने उसे पहली बार दर्शन और नैतिकता की दिशा में उन्मुख किया। इसके लिए उन्होंने स्वयं तो दर्शन शास्त्र का गहरा अध्ययन किया ही, उसे अर्थशास्त्र के साथ पढ़ाना भी-विशेष रूप से अमेरिका के हारवर्ड विश्वविद्यालय में-आरम्भ किया। मूल सिद्धान्तों के गणितीय निर्माण और विकास के साथ-साथ उन्होंने इसके व्यावहारिक पक्ष-राष्ट्रीय आय, नौकरियाँ, विषमता और ग़रीबी आदि की गणना और मापन को भी बहुत दूर तक विकसित किया है। यह पुस्तक विषय के मूल सिद्धान्तों को तकनीकी और ग़ैर-तकनीकी दोनों ही ढंग से बहुत सफलतापूर्वक प्रस्तुत करती है। यह वह बीजरूपी आधार है जिस पर उनके कल्याणकारी अर्थशास्त्र का विशाल वटवृक्ष खड़ा है। विकासशील देशों के लिए प्रो. अमर्त्य सेन के विचार और उन पर आधारित योजनाएँ विशेष महत्त्वपूर्ण हैं। यह रचना दुनिया भर में बहुत प्रसिद्ध हुई है। ‘‘बहुत कम ऐसा होता है कि इतनी छोटी पुस्तक अपने विषय का इतना समग्र विवेचन प्रस्तुत कर सके-जैसा आर्थिक विषमता के महत्त्वपूर्ण विषय का इस रचना ने किया है।’’ –इकानामिस्ट ‘‘लेखक का दिमाग़ सर्चलाइट की तरह काम करता है और पुरानी स्थापित धारणाओं का खंडन करता चलता है।’’ -लंदन रिव्यू आफ बुक्स

SPECIFICATION:
- Publisher :Rajpal and Sons
- By: Amartya Sen (Author)
- Binding :Hardcover
- Language: Hindi
- Edition :2019
- Pages: 312 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10::8170283809
- ISBN-13: 9788170283805
DESCRIPTION:
प्रो. अमर्त्य सेन की आज तक प्रकाशित सभी कृतियों में अन्यतम, जो इक्कीसवीं सदी में मनुष्य के समग्र विकास, संतुष्टि तथा सुरक्षा के लिये एक बिलकुल नवीन दर्शन प्रस्तुत करती है और जो गरीबी हटाने की कार्ययोजना का भी आधार बन सकती है। पाश्चात्य जगत में भूरि-भूरि प्रशंसित। अद्भुत...इस पुस्तक में यह तर्क अपना चरम उत्कर्ष प्राप्त करता है कि विकास का प्रमुख लक्ष्य तथा उद्देश्य स्वातंत्र्य ही है। लेखक ने एक कठिन विषय के सभी पक्षों को बड़े सहज ढंग से प्रस्तुत किया है।-न्यूयॉर्क टाइम्स। अन्य नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्रियों के विपरीत अमर्त्य सेन ने समाज के सबसे निचले वर्ग के लोगों को अपना विषय बनाया है। उन्होंने शीर्ष पर स्थित लोगों पर ध्यान नहीं दिया है।-शिकागो ट्रिब्यून। अमर्त्य सेन द्वारा व्यक्त तथा समर्पित विचार अत्यंत आकर्षक हैं।-इकोनॉमिस्ट। इस पुस्तक में तर्क की ताज़गी के साथ विरोधी विचारों को भी स्वीकार करने की भावना है।-एटलांटिक मंथली। अमर्त्य सेन के विचार क्रांतिकारी संभावनाओं से पूर्ण हैं।-फॉरेन अफेयर्स। बिलकुल नए विचार...ताज़गी से भरपूर, विद्वतापूर्ण तथा मानवीय...सेन के आशावाद तथा योजनाओं से मनुष्य सोचने लगता है कि समस्याओं का सचमुच कोई हल है।-बिज़नेस वीक।

SPECIFICATION:
- Publisher :Rajpal and Sons
- By: Walter Scott (Author)
- Binding :Paperback
- Language: Hindi
- Edition :2016
- Pages: 88 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10::8174830030
- ISBN-13: 9788174830036
DESCRIPTION:
सर वाल्टर स्कॉट के प्रसिद्ध उपन्यास 'इवानहो' का सरल रूपांतर हम यहाँ पढ़ सकते हैं।

SPECIFICATION:
- Publisher :Rajpal and Sons
- By: Walter Scott (Author)
- Binding :Paperback
- Language: Hindi
- Edition :2014
- Pages: 64 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10::8174830111
- ISBN-13: 9788174830111
DESCRIPTION:
SPECIFICATION:
- Publisher :Rajpal and Sons
- By: Sayyed Asad Ali (Author)
- Binding :Hardcover
- Language: Hindi
- Edition :2015
- Pages: 284 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10:: 8170286891
- ISBN-13: 9788170286899
DESCRIPTION:
प्रस्तुत शब्दकोश में उर्दू के बहुप्रचलित शब्दों के साथ ही अरबी, फारसी, तुर्की से आगत उन उपयोगी शब्दों को भी जमा किया गया है जो अच्छी हिन्दी का आवश्यक अंग बन गए हैं या जिनकी सहायता से उर्दू साहित्य का अच्छा ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है तथा उर्दू शब्दों के सही उच्चारण और अर्थ को समझा जा सकता है। यह विशेष ध्यान रखा गया है कि सभी ज़रूरी शब्द इसमें अवश्य लिए जाएं। यह शब्दकोश आज की नई पीढ़ी के उन पाठकों के लिए बहुत उपयोगी है जो उर्दू शब्दों, मुहावरों और शायरी को सुनकर दिलचस्पी का इज़हार तो करते हैं, लेकिन उर्दू भाषा से अपरिचित होने के कारण उसका आनन्द नहीं उठा पाते। अध्येताओं और सामान्य पाठकों के लिए समान रूप से उपयोगी शब्दकोश।
SPECIFICATION:
- Publisher :Rajpal and Sons
- By: Surendranath Saxena (Author)
- Binding :Paperback
- Language: Hindi
- Edition :2015
- Pages: 40 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10:: 9350643197
- ISBN-13: 9789350643198
DESCRIPTION:
SPECIFICATION:
- Publisher : RASBIHARI LAL & SONS
- By : SRILA BHAKTIVINODA THAKURA
- Cover : Hardcover
- Language : English
- Edition : 2004
- Pages : 181
- Weight : 500 gm
- Size : 7.9 x 5.5 x 1.6 inches
- ISBN-10 : 8187812664
- ISBN-13 : 978-8187812661
DESCRIPTION:
Introduction : As Prarthana and Prema Bhakti Candrika of Sri Narottama dasa Thakura are widely known, resepected, and relished by the Caudiya Vaisnavas, so are the songs of Srila Bhaktivinoda Thakura. These songs are not only beneficial for the gross materalists and practitioners of devotional service. They are also relished by the exalted souls who have attained perfection. The songs composed by Srila Bhaktivinoda Thakura are very instructive and practical for people of all ages, of all castes, and of all religions. The songs of Sri Narottamadasa Thakura are especially meant for devotees who are cultivating devotional service, but Srila Bhaktivinoda Thakura has songs are intended for all classes of people. By means of these songs, he hopes to attract everyone to the path of devotional service. Srila Bhaktivinoda Thakura has written countless songs. These songs are divided into four books called Kalyana Kalpataru, Saranagati, Gitavali and Gitamala.Srila Bhaktivinoda Thakura's songs are proof of his cause-less mercy upon the fallen souls of the entire world. We pray that the faithful readers will relish these songs, attain spiritual realization, and ultimately go back to Godhead.

SPECIFICATION:
- Publisher :Rajpal and Sons
- By: Richa Saxena (Author)
- Binding :Paperback
- Language: English
- Edition :2016
- Pages: 168 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10::93506423110
- ISBN-13: 9789350642313
DESCRIPTION:
Often called The Mother Teresa of Economics, Professor Amartya Sen is credited with giving a human face to the subject of Economics and bringing into its discourse issues such as social justice, democracy, freedom, philosophy, health care, gender inequality and literacy. Featuring in Time magazine's 2010 list of top 100 people in the world, Amartya Sen says, ''My job as an economist has been about identifying injustice, and I am concerned with developing human freedom and capabilities as tools." In 1998 Amartya sen was awarded the Nobel Prize for Economics for his work in welfare economics. His intellectual odyssey has taken him across the globe from Jadavpur, Kolkata, Delhi in India, to Oxford and Cambridge in the UK and Harvard and Berkeley in the US. He has authored several books many of which have been translated into more than 30 languages. Even at this age the amount of work and travel that he does is astounding and at the last count had been awarded 89 honorary doctorates. What makes Amartya Sen tick? What keeps him going? What were the defining moments in his life? Who and what have been the major influences in his life? Read about all this and more in the definitive biography which features some rare photographs from Amartya Sen's personal collection.
SPECIFICATION:
- Publisher :Rajpal and Sons
- By: Shripad D.Satvlekar (Author)
- Binding :Paperback
- Language: Hindi
- Edition :2020
- Pages: 364 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10::9389373425
- ISBN-13: 9789389373424
DESCRIPTION:

SPECIFICATION:
- Publisher :Rajpal and Sons
- By: Satya Saran (Author)
- Binding :Paperback
- Language: Hindi
- Edition :2011
- Pages: 224 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10::8170289327
- ISBN-13: 9788170289104
DESCRIPTION:
‘‘मुझे पता था कि गुरु दत्त अपनी कुण्डली पहले भी बनवा चुके थे और तो और उन्होंने मेरी भी कुण्डली बनवा दी थी, संयोग से हम दोनों की राशि कर्क ही निकली। उनका जन्म नौ को हुआ था। जब उन्हें ज्ञात हुआ कि मेरी पैदाइश एक की थी तो वह बहुत प्रसन्न हुए। ‘नौ और एक मिल कर दस होते हैं, और दस एक बहुत ही शक्तिशाली संख्या है।’ पण्डित ने कुण्डली देख कर कहा, ‘यह एक उत्तम कुण्डली है। अगला दशक चिन्तामुक्त रहेगा और जीवन मंगलमय।’ ‘और दस वर्ष के बाद?’ जिज्ञासु दत्त ने प्रश्न किया था। गुरु दत्त के प्रश्न के उत्तर में पण्डित ने उन्हें ध्यान से देख कर कहा, ‘अगले दशक के बाद मुझे एक विप्लव की सम्भावना नज़र आ रही है। तुम्हारी और अब्रार की साझेदारी के समापन के आसार हैं; अगर देखा जाये तो ज्योतिषी द्वारा की गयी यह भविष्यवाणी दत्त के व्यावसायिक जीवन के लिये प्रासंगिक थी। फिल्म जगत में किसी के लिये भी उतार चढ़ाव एक आम बात है, इसलिये मैंने ज्योतिषवाणी पर कोई विशेष ध्यान नहीं दिया किन्तु आगे जो घटा उसके कारण मेरा दृष्टिकोण बदल गया। मुझे अब नक्षत्रों के खेल पर विश्वास हो चला था...’’

SPECIFICATION:
- Publisher :Rajpal and Sons
- By: Satya Saran (Author)
- Binding :Hardcover
- Language: Hindi
- Edition :2011
- Pages: 224 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10:: 8170289106
- ISBN-13: 9788170289104
DESCRIPTION:
‘‘मुझे पता था कि गुरु दत्त अपनी कुण्डली पहले भी बनवा चुके थे और तो और उन्होंने मेरी भी कुण्डली बनवा दी थी, संयोग से हम दोनों की राशि कर्क ही निकली। उनका जन्म नौ को हुआ था। जब उन्हें ज्ञात हुआ कि मेरी पैदाइश एक की थी तो वह बहुत प्रसन्न हुए। ‘नौ और एक मिल कर दस होते हैं, और दस एक बहुत ही शक्तिशाली संख्या है।’ पण्डित ने कुण्डली देख कर कहा, ‘यह एक उत्तम कुण्डली है। अगला दशक चिन्तामुक्त रहेगा और जीवन मंगलमय।’ ‘और दस वर्ष के बाद?’ जिज्ञासु दत्त ने प्रश्न किया था। गुरु दत्त के प्रश्न के उत्तर में पण्डित ने उन्हें ध्यान से देख कर कहा, ‘अगले दशक के बाद मुझे एक विप्लव की सम्भावना नज़र आ रही है। तुम्हारी और अब्रार की साझेदारी के समापन के आसार हैं; अगर देखा जाये तो ज्योतिषी द्वारा की गयी यह भविष्यवाणी दत्त के व्यावसायिक जीवन के लिये प्रासंगिक थी। फिल्म जगत में किसी के लिये भी उतार चढ़ाव एक आम बात है, इसलिये मैंने ज्योतिषवाणी पर कोई विशेष ध्यान नहीं दिया किन्तु आगे जो घटा उसके कारण मेरा दृष्टिकोण बदल गया। मुझे अब नक्षत्रों के खेल पर विश्वास हो चला था...’’
SPECIFICATION:
- Publisher :Rajpal and Sons
- By: Rahul Sankrityayan (Author)
- Binding :Paperback
- Language: Hindi
- Edition :2010
- Pages: 72 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10:: 8170284899
- ISBN-13: 9788170284895
DESCRIPTION:
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