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SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Amritlal Nagar(Author)
- Binding :Paperback
- Language : Hindi
- Edition :2017
- Pages: 40 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10: 8170285496
- ISBN-13: 9788170285496
DESCRIPTION:

SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Amritlal Nagar(Author)
- Binding :Hardcover
- Language : Hindi
- Edition :2019
- Pages: 328 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10: 8170280052
- ISBN-13: 9788170280057
DESCRIPTION:
अमृतलाल नागर हिन्दी साहित्य के एक दिग्गज माने जाते हैं जिन्होंने उपन्यास, व्यंग्य, संस्मरण और बाल-साहित्य जैसी अलग-अलग विधाओं में लिखा। ‘नाच्यौ बहुत गोपाल’ में अपनी विशिष्ट शैली में सर्वथा नवीनतम धरातल पर मानवीय संवेदना के जीते-जागते पात्र उपस्थित किए हैं।

SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Amritlal Nagar(Author)
- Binding :Paperback
- Language : Hindi
- Edition :2016
- Pages: 128 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10: 9350640651
- ISBN-13: 9789350640654
DESCRIPTION:
प्रेमचंद के बाद के कथाकारों में अमृतलाल नागर का स्थान बहुत ऊँचा है, और उन्हें हिन्दी साहित्य को विश्व स्तर पर ले जाने का गौरव प्राप्त है। उपन्यासों की भांति उनकी कहानियाँ भी सभी रंगों में लिखी गई हैं और बहुत पसंद की जाती रही हैं। इस संकलन के लिए उन्होंने स्वयं कहानियाँ चुनी हैं जो उनकी समग्र कथायात्रा का प्रतिनिधित्व करती हैं।

SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Amritlal Nagar(Author)
- Binding :Hardcover
- Language : Hindi
- Edition :2017
- Pages: 380 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10: 8170282497
- ISBN-13: 9788170282495
DESCRIPTION:
"मानस का हंस" लेखक अमृतलाल नागर का प्रतिष्ठित बृहद उपन्यास है। इसमें पहली बार व्यापक कैनवास पर "रामचरितमानस" के लोकप्रिय लेखक गोस्वामी तुलसीदास के जीवन को आधार बनाकर कथा रची गई है, जो विलक्षण के रूप से प्रेरक, ज्ञानवर्धक और पठनीय है। इस उपन्यास में तुलसीदास का जो स्वरूप चित्रित किया गया है, वह एक सहज मानव का रूप है। यही कारण है कि "मानस का हंस" हिन्दी उपन्यासों में 'क्लासिक' का सम्मान पा चुका है और हिन्दी साहित्य की अमूल्य निधि माना जाता है। नागर जी ने इसे गहरे अध्ययन और मंथन के पश्चात अपने विशिष्ट लखनवी अन्दाज़ में लिखा है। बृहद होने पर भी यह उपन्यास अपनी रोचकता में अप्रतिम है।

SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Amritlal Nagar(Author)
- Binding :Paperback
- Language : Hindi
- Edition :2016
- Pages: 232 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10: 9350642417
- ISBN-13: 9789350642412
DESCRIPTION:
भारतीय संस्कृति में 'महाभारत' को एक विशेष स्थान प्राप्त है। 'रामायण' की भांति इसे घर-घर में पढ़ा जाता है। हमारे धर्म-चिंतन का सर्वोपरि ग्रंथ ‘श्रीमद्भगवद्गीता’ इसी का अंग है। प्रसिद्ध उपन्यासकार अमृतलाल नागर ने महाभारत की सम्पूर्ण कथा बड़े सरल शब्दों तथा प्रवाहपूर्ण भाषा में प्रस्तुत की है। 'महाभारत' की संपूर्ण संक्षिप्त कथा सरल भाषा-शैली में-उपन्यासकार अमृतलाल नागर की कलम से।
SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Amritlal Nagar(Author)
- Binding :Paperback
- Language : Hindi
- Edition :2012
- Pages: 32 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10: 8170282179
- ISBN-13: 9788170282174
DESCRIPTION:

SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Amritlal Nagar(Author)
- Binding :Paperback
- Language : Hindi
- Edition :2008
- Pages: 32 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10: 8170282187
- ISBN-13: 9788170282181
DESCRIPTION:
अमृतलाल नागर ने दुनिया के महान विचारक व्यक्तियों के जीवन पर आधारित कहानियां इस पुस्तक में लिखीं हैं।

SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Amritlal Nagar(Author)
- Binding :Hardcover
- Language : Hindi
- Edition :2017
- Pages: 248 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10: 8170280060
- ISBN-13: 9788170280064
DESCRIPTION:
प्रेमचन्द के बाद विश्व प्रसिद्ध श्रेष्ठ उपन्यासकारों में श्री अमृतलाल नागर का एक विशिष्ट स्थान है। उनके अन्य उपन्यास ‘मानस का हंस’, ‘खंजन नयन’, ‘नाच्यौ बहुत गोपाल’, ‘बूंद और समुद्र’, ‘बिखरे तिनके’, ‘सेठ बांकेमल’, ‘भूख’, ‘सात घूंघट वाला मुखड़ा’ तथा ‘अमृत और विष’ हिन्दी-साहित्य की अमूल्य निधि हैं, जिनमें मानव-जीवन की सजीव अभिव्यक्ति अत्यन्त रोचक शैली में हुई है।

SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Amritlal Nagar(Author)
- Binding :Hardcover
- Language : Hindi
- Edition :2015
- Pages: 360 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10: 8170281369
- ISBN-13: 9788170281368
DESCRIPTION:
प्रेमचन्द के बाद विश्व प्रसिद्ध श्रेष्ठ उपन्यासकारों में श्री अमृतलाल नागर का एक विशिष्ट स्थान है। उनके अन्य उपन्यास ‘मानस का हंस’, ‘खंजन नयन’, ‘नाच्यौ बहुत गोपाल’, ‘बूंद और समुद्र’, ‘बिखरे तिनके’, ‘सेठ बांकेमल’, ‘भूख’, ‘सात घूंघट वाला मुखड़ा’ तथा ‘अमृत और विष’ हिन्दी-साहित्य की अमूल्य निधि हैं, जिनमें मानव-जीवन की सजीव अभिव्यक्ति अत्यन्त रोचक शैली में हुई है।

SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Amritlal Nagar(Author)
- Binding :Hardcover
- Language : Hindi
- Edition :2015
- Pages: 104 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10: 8170288320
- ISBN-13: 9788170288329
DESCRIPTION:
लखनऊ और अवध सदा से अपनी विशिष्ट संस्कृति के लिए विख्यात रहा है। नज़ाकत और नफासत के लिए विशेष रूप से जानी जाने वाली लखनवी संस्कृति आज भी वहां के जन मानस में ज़िन्दा है। वहां के निवासियों का यह कहना सच ही है कि ‘हम फिदा-ए-लखनऊ’, लखनऊ हम पे फिदा’। जीवन भर लखनऊ में रहने वाले प्रसिद्ध साहित्यकार अमृतलाल नागर की ये कहानियां मनोरंजन के साथ लखनऊ के जनजीवन के हर पहलू को उजागर करती हैं।
SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Amritlal Nagar(Author)
- Binding :Paperback
- Language : Hindi
- Edition :2016
- Pages: 236 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10: 9350642697
- ISBN-13: 9789350642696
DESCRIPTION:
यशस्वी साहित्यकार अमृतलाल नागर की यह कृति ‘गदर के फूल’ सत्तावनी क्रान्ति संबंधी स्मृतियों और किंवदंतियों का प्रामाणिक दस्तावेज़ है। भारत की स्वतन्त्रता के लिए 1857 में क्रान्ति की एक चिंगारी भड़की थी जिसे अंग्रेज़ों ने ‘गदर’ का नाम दिया था। उस काल के व्यक्ति अब छीजते जा रहे हैं। उन्हीं स्मृतियों को नागर जी ने इस पुस्तक में संजोया है। अवध में घूम-घूमकर, उस काल के प्रत्यदर्शी लोगों के संस्मरणों के माध्यम से तथा अन्य उपलब्ध ऐतिहासिक प्रमाणों को आधार बनाकर नागर जी ने इस पुस्तक की सामग्री का संचयन किया है।

SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Amritlal Nagar(Author)
- Binding :Hardcover
- Language : Hindi
- Edition :2019
- Pages: 548 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10: 8170286271
- ISBN-13: 9788170286271
DESCRIPTION:
पद्मभूषण से सम्मानित अमृतलाल नागर की गिनती बीसवीं सदी के हिन्दी साहित्य के प्रमुख लेखकों में होती है। उनके लेखन की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि वे अपनी कहानियों और उपन्यासों में पात्रों का ऐसा चित्रण करते थे जो कि कहानी खत्म होने के बाद भी लम्बे समय तक पाठक के दिलोदिमाग पर छाये रहते थे। इसी खूबी के कारण कई बार उनकी तुलना प्रेमचन्द से की जाती है। 17 अगस्त, 1916 में आगरा, उत्तर प्रदेश में जन्मे अमृतलाल नागर को उनके 74 वर्ष के जीवनकाल में अनेक सम्मानों से नवाज़ा गया। उन्होंने उपन्यास, कहानी, यात्रा-वृत्तान्त, संस्मरण, जीवनी, निबन्ध, रिपोर्ताज, व्यंग्य, नाटक और बच्चों के लिए पुस्तकें-सभी विधाओं में काम किया। इसके अतिरिक्त अन्य भाषाओं से कई महत्त्वपूर्ण कृतियों को हिन्दी में अनुदित किया। साहित्य के अतिरिक्त उन्होंने रेडियो, रंगमंच और फिल्मों में भी सक्रिय योगदान दिया। प्रस्तुत ग्रन्थ में उनकी सभी कहानियों को एक साथ सम्मिलित किया गया है।

SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Amritlal Nagar(Author)
- Binding :Hardcover
- Language : Hindi
- Edition :2016
- Pages: 224 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10: 9350643979
- ISBN-13: 9789350643976
DESCRIPTION:
अमृतलाल नागर की लेखनी से हास्य-व्यंग्य मिश्रित जिन विभिन्न रचनाओं का सृजन हुआ वे अपने आप में विलक्षण हैं। ये समय-समय पर विविध पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई थीं। उनके कई संग्रह निकले जिन्हें बेहद पसन्द किया गया। ‘चकल्लस’ के नाम से उन्होंने एक पत्र भी निकाला जिसका साहित्य जगत में अपना एक विशेष स्थान बन गया। ‘चकल्लस’ में नागर जी की सभी श्रेष्ठ हास्य-व्यंग्य रचनाएँ एक साथ प्रकाशित हैं। इससे इनकी विविधता तथा लेखक के सहज विनोदी स्वभाव का ज्ञान होता है। अमृतलाल नागर का जन्म 17 अगस्त 1916 में आगरा में हुआ था। वे उन्नीसवीं सदी के हिन्दी साहित्य के महत्त्वपूर्ण लेखक थे जिन्हें अक्सर प्रेमचंद का साहित्यिक वारिस माना जाता है। उनके लेखन की विशेषता थी यादगार चरित्रों का सृजन, जो पुस्तक पढ़ने के बाद भी देर तक पाठक के दिलो-दिमाग पर अपना प्रभाव छोड़ते थे। बहुआयामी प्रतिभा वाले नागर जी ने 74 वर्ष के जीवन काल में सभी विधाओं पर लिखा जिसमें कहानी, उपन्यास, नाटक, निबन्ध, संस्मरण और बच्चों के लिए कई रोचक पुस्तकें हैं। 1967 में उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार और 1981 में पद्मविभूषण से सम्मानित किया गया। उनके उपन्यास मानस का हंस, नाच्यौ बहुत गोपाल और खंजन नयन हिन्दी साहित्य में मील के पत्थर साबित हुए।

SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Amritlal Nagar(Author)
- Binding :Hardcover
- Language : Hindi
- Edition :2019
- Pages: 108 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10: 8170285607
- ISBN-13: 9788170285601
DESCRIPTION:
‘‘हिन्दुस्तान पर महायुद्ध की परछाईं पड़ने लगी। हर शख्स के दिल से ब्रिटिश सरकार का विश्वास उठ गया। यथाशक्ति लोगों ने चावल जमा करना शुरू किया। रईसों ने बरसों के लिए खाने का इन्तज़ाम कर लिया। मध्यवर्गीय नौकरीपेशा गृहस्थों ने अपनी शक्ति के अनुसार दो-तीन महीने से लेकर छः महीने तक की खुराक जमा कर ली। खेतिहर मज़दूर भीख माँगने पर मजबूर हुआ। भूख ने मेहनत-मज़दूरी करनेवाले ईमानदार इन्सानों को खूँखार लुटेरा बना दिया। भूख ने सतियों को वेश्या बनने पर मजबूर किया। मौत का डर बढ़ने लगा। और एक दिन चिर आशंकित, चिर प्रत्याशित मृत्यु, भूख को दूर करने के समस्त साधनों के रहते हुए भी, भूखे मानव को अपना आहार बनाने लगी...’’-इस पुस्तक में से। अमृतलाल नागर उन्नीसवीं सदी के हिन्दी साहित्य के महत्त्वपूर्ण लेखक थे, जिन्हें अक्सर प्रेमचंद का साहित्यिक वारिस माना जाता है। उनके लेखन की विशेषता थी यादगार चरित्रों का सृजन, जो पुस्तक पढ़ने के बाद भी देर तक पाठक के दिलो-दिमाग पर अपना प्रभाव छोड़ते थे। बहुआयामी प्रतिभा वाले नागर जी ने 74 वर्ष के जीवन काल में सभी विधाओं पर लिखा जिसमें कहानी, उपन्यास, नाटक, निबन्ध, संस्मरण और बच्चों के लिए कई रोचक पुस्तकें हैं। 1967 में उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार और 1981 में पद्मविभूषण से सम्मानित किया गया। उनके उपन्यास मानस का हंस, नाच्यौ बहुत गोपाल और खंजन नयन हिन्दी साहित्य में मील के पत्थर साबित हुए।

SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Amritlal Nagar(Author)
- Binding :Paperback
- Language : Hindi
- Edition :2016
- Pages: 176 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10: 9350643758
- ISBN-13: 9789350643754
DESCRIPTION:
‘‘हिन्दुस्तान पर महायुद्ध की परछाईं पड़ने लगी। हर शख्स के दिल से ब्रिटिश सरकार का विश्वास उठ गया। यथाशक्ति लोगों ने चावल जमा करना शुरू किया। रईसों ने बरसों के लिए खाने का इन्तज़ाम कर लिया। मध्यवर्गीय नौकरीपेशा गृहस्थों ने अपनी शक्ति के अनुसार दो-तीन महीने से लेकर छः महीने तक की खुराक जमा कर ली। खेतिहर मज़दूर भीख माँगने पर मजबूर हुआ। भूख ने मेहनत-मज़दूरी करनेवाले ईमानदार इन्सानों को खूँखार लुटेरा बना दिया। भूख ने सतियों को वेश्या बनने पर मजबूर किया। मौत का डर बढ़ने लगा। और एक दिन चिर आशंकित, चिर प्रत्याशित मृत्यु, भूख को दूर करने के समस्त साधनों के रहते हुए भी, भूखे मानव को अपना आहार बनाने लगी...’’-इस पुस्तक में से। अमृतलाल नागर उन्नीसवीं सदी के हिन्दी साहित्य के महत्त्वपूर्ण लेखक थे, जिन्हें अक्सर प्रेमचंद का साहित्यिक वारिस माना जाता है। उनके लेखन की विशेषता थी यादगार चरित्रों का सृजन, जो पुस्तक पढ़ने के बाद भी देर तक पाठक के दिलो-दिमाग पर अपना प्रभाव छोड़ते थे। बहुआयामी प्रतिभा वाले नागर जी ने 74 वर्ष के जीवन काल में सभी विधाओं पर लिखा जिसमें कहानी, उपन्यास, नाटक, निबन्ध, संस्मरण और बच्चों के लिए कई रोचक पुस्तकें हैं। 1967 में उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार और 1981 में पद्मविभूषण से सम्मानित किया गया। उनके उपन्यास मानस का हंस, नाच्यौ बहुत गोपाल और खंजन नयन हिन्दी साहित्य में मील के पत्थर साबित हुए।

SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Amritlal Nagar(Author)
- Binding :Paperback
- Language : Hindi
- Edition :2018
- Pages: 120 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10: 8170287316
- ISBN-13: 9788170287315
DESCRIPTION:
विष्णुभट्ट गोडशे द्वारा लिखा 1857 के स्वतंत्रता संग्राम का एकमात्र आँखों देखा विवरण और प्रसिद्ध हिन्दी कथाकार अमृतलाल नागर का उतना ही सरल और सटीक अनुवाद। पुस्तक की घटनाएं चित्रपट की तरह एक सूत्र में बंधी हुई आगे बढ़ती हैं। हर दृश्य, हर घटना का वर्णन इतना मार्मिक, रोमांचक और जीवंत है कि पाठक उसमें आकंठ डूब जाता है।
SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Amritlal Nagar(Author)
- Binding :Paperback
- Language : Hindi
- Edition :2016
- Pages: 32 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10: 8170284082
- ISBN-13: 9788170284086
DESCRIPTION:
SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Amritlal Nagar(Author)
- Binding :Hardcover
- Language : Hindi
- Edition :2014
- Pages: 148 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10: 8170285577
- ISBN-13: 9788170285571
DESCRIPTION:
भारतीय जन-जीवन के कुशल कथाशिल्पी प्रेमचन्द की श्रेष्ठ कहानियों के नाट्य-रूपान्तर, जिन्हें सुपरिचित कथाकार चित्रा मुद्गल ने प्रस्तुत किया है। रेडियो और दूरदर्शन से प्रसारित हो चुके ये नाटक स्कूलों के छात्र भी आसानी से खेल सकते हैं। ‘व्यास सम्मान’ से सम्मानित हिन्दी की प्रतिष्ठित कथाकार चित्रा मुद्गल ने कहानियों का नाट्य-रूपान्तर किया है। सुगमता से अभिनीत हो सकने वाले नाटकों का हिन्दी में अभाव है। प्रेमचन्द की कहानियों के ये नाट्य-रूपान्तर इस कमी को पूरा करेंगे।
SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Chitra Mudgal(Author)
- Binding :Paperback
- Language : Hindi
- Edition :2018
- Pages: 124 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10:81702895310
- ISBN-13: 9788170289531
DESCRIPTION:
भारतीय जन-जीवन के कुशल कथाशिल्पी प्रेमचन्द की श्रेष्ठ कहानियों के नाट्य-रूपान्तर, जिन्हें सुपरिचित कथाकार चित्रा मुद्गल ने प्रस्तुत किया है। रेडियो और दूरदर्शन से प्रसारित हो चुके ये नाटक स्कूलों के छात्र भी आसानी से खेल सकते हैं। ‘व्यास सम्मान’ से सम्मानित हिन्दी की प्रतिष्ठित कथाकार चित्रा मुद्गल ने कहानियों का नाट्य-रूपान्तर किया है। सुगमता से अभिनीत हो सकने वाले नाटकों का हिन्दी में अभाव है। प्रेमचन्द की कहानियों के ये नाट्य-रूपान्तर इस कमी को पूरा करेंगे।

SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Chitra Mudgal(Author)
- Binding :Paperback
- Language : Hindi
- Edition :2016
- Pages: 136 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10:8170288878
- ISBN-13: 9788170288879
DESCRIPTION:
भारतीय जन-जीवन के कुशल कथाशिल्पी प्रेमचन्द की श्रेष्ठ कहानियों के नाट्य-रूपान्तर, जिन्हें सुपरिचित कथाकार चित्रा मुद्गल ने प्रस्तुत किया है। रेडियो और दूरदर्शन से प्रसारित हो चुके ये नाटक स्कूलों के छात्र भी आसानी से खेल सकते हैं। ‘व्यास सम्मान’ से सम्मानित हिन्दी की प्रतिष्ठित कथाकार चित्रा मुद्गल ने कहानियों का नाट्य-रूपान्तर किया है। सुगमता से अभिनीत हो सकने वाले नाटकों का हिन्दी में अभाव है। प्रेमचन्द की कहानियों के ये नाट्य- रूपान्तर इस कमी को पूरा करेंगे।

SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Chitra Mudgal(Author)
- Binding :Hardcover
- Language : Hindi
- Edition :2013
- Pages: 128 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10:9350641283
- ISBN-13: 9789350641286
DESCRIPTION:
‘व्यास सम्मान’, बिहार राजभाषा परिषद् तथा हिन्दी अकादमी से पुरस्कृत चित्रा मुद्गल हिन्दी की सुपरिचित कहानीकार हैं। उनकी बीस से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी है जिनमें ‘जिनावर’ और ‘एक ज़मीन अपनी’ विशेष रूप से चर्चित रहीं। चित्रा जी की कहानियाँ कोरी कल्पना पर आधारित न होकर ठोस यथार्थ से पाठक को रू-ब-रू कराती हैं। उनकी कहानियाँ पात्रों को स्वयं अपने मानवीय मूल्यों के प्रति सजग करती हैं। उसके जड़ चेतन को कुरेदती हैं। इसीलिए ये कहानियाँ पाठकों पर गहरा और दूरगामी असर छोड़ती हैं।

SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Chitra Mudgal(Author)
- Binding :Paperback
- Language : Hindi
- Edition :2019
- Pages: 128 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10:9350641275
- ISBN-13: 9789350641279
DESCRIPTION:
‘व्यास सम्मान’, बिहार राजभाषा परिषद् तथा हिन्दी अकादमी से पुरस्कृत चित्रा मुद्गल हिन्दी की सुपरिचित कहानीकार हैं। उनकी बीस से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी है जिनमें ‘जिनावर’ और ‘एक ज़मीन अपनी’ विशेष रूप से चर्चित रहीं। चित्रा जी की कहानियाँ कोरी कल्पना पर आधारित न होकर ठोस यथार्थ से पाठक को रू-ब-रू कराती हैं। उनकी कहानियाँ पात्रों को स्वयं अपने मानवीय मूल्यों के प्रति सजग करती हैं। उसके जड़ चेतन को कुरेदती हैं। इसीलिए ये कहानियाँ पाठकों पर गहरा और दूरगामी असर छोड़ती हैं।

SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Chitra Mudgal(Author)
- Binding :Paperback
- Language : Hindi
- Edition :2016
- Pages: 120 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10: 8170288886
- ISBN-13: 9788170288886
DESCRIPTION:
भारतीय जन-जीवन के कुशल कथाशिल्पी प्रेमचन्द की श्रेष्ठ कहानियों के नाट्य-रूपान्तर, जिन्हें सुपरिचित कथाकार चित्रा मुद्गल ने प्रस्तुत किया है। रेडियो और दूरदर्शन से प्रसारित हो चुके ये नाटक स्कूलों के छात्र भी आसानी से खेल सकते हैं। ‘व्यास सम्मान’ से सम्मानित हिन्दी की प्रतिष्ठित कथाकार चित्रा मुद्गल ने कहानियों का नाट्य-रूपान्तर किया है। सुगमता से अभिनीत हो सकने वाले नाटकों का हिन्दी में अभाव है। प्रेमचन्द की कहानियों के ये नाट्य- रूपान्तर इस कमी को पूरा करेंगे।

SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Patrick Modiano (Author)
- Binding :Hardcover
- Language : Hindi
- Edition :2016
- Pages: 192 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10: 9350643405
- ISBN-13: 9789350643402
DESCRIPTION:
जाँ दारागान एकान्त-पसन्द लेखक है जो पेरिस के शोरोगुल से दूर शान्ति से अपना जीवन व्यतीत कर रहा है। उसके शान्तमय जीवन में ऐसी उथल-पुथल मच जाती है जब सितम्बर की एक दोपहर को ओतोलीनी नामक एक व्यक्ति का फ़ोन आता है। ओतोलीनी के हाथ आयी है जाँ दारागान की पुरानी नोटबुक, जिसमें एक विशेष व्यक्ति का नाम दर्ज है, जिसके बारे में ओतोलीनी पूछताछ करना चाहता है। लेकिन लाख कोशिश करने पर भी दारागान, ओतोलीनी को उस व्यक्ति के बारे में कुछ बता नहीं पाता लेकिन ओतोलीनी के लिए उस व्यक्ति को ढूँढना बहुत ज़रूरी है। दारागान उस व्यक्ति की तलाश में ओतोलीनी के साथ लग जाता है और वहीं से उसकी ज़िन्दगी में एक अलग मोड़ आता है। इस कहानी की अपनी ही एक रहस्यमय लय और ताल है, पाठक जैसे-जैसे इसे पढ़ता है वह इन पात्रों की ज़िन्दगी में डूबता जाता है। 2014 में साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित विश्वस्तरीय फ्रांसीसी लेखक, पाट्रिक मोदियानो, की गिनती इक्कीसवीं सदी के महत्त्वपूर्ण लेखकों में की जाती है। अब तक पाट्रिक मोदियानो की तीस से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। वे उन गिने-चुने लेखकों में से हैं जिनको आलोचकों और पाठकों, दोनों के बीच समर्थन और लोकप्रियता मिली है। फ्रांस में उन्हें साहित्य में योगदान के लिए 2010 में Prix Mondial Cino Del Duca, पुरस्कार 2012 में Austrian State Prize for European Literature से सम्मानित किया गया। उनकी कृतियाँ विश्व की 30 भाषाओं में अनूदित हो चुकी हैं।
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